देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बाद अब तमाम सियासी पार्टियों की नज़रें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर है। तीन हिन्दी भाषी राज्यों में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद बीजेपी अपने सियासी समीकरणों को खांचे में बैठाने का प्रयास कर रही हैं। इन तीन राज्यों में बीजेपी की जीत कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह लोकसभा चुनाव को काफी प्रभावित करने वाले नतीजे भी माने जा रहे हैं। इन तीनों राज्यों में कुल मिलाकर 65 लोकसभा और 520 विधानसभा सीटें हैं। बीजेपी की नजर है कि वे इन नतीजों को लोकसभा चुनाव तक कायम रख पाए।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुने गए मुख्यमंत्री राजनीतिक तजुर्बे के हिसाब से काफी नए नाम माने जाते हैं। उन्हें शिवराज सिंह चौहान, वसुंधरा राजे और रमन सिंह जैसे राजनीतिक दिग्गजों की जगह लेने के लिए चुना गया है। ठीक ऐसा ही उपमुख्यमंत्रियों के के नामों के साथ भी है, जहां दीया कुमारी और अरुण साव के अलावा सभी नाम काफी नए हैं। अब चर्चा यह है कि आखिर बीजेपी ने ऐसा क्यों किया है? इस सवाल का जवाब यह कहता है कि इन नामों का चुनाव पार्टी द्वारा अपनाई गई एक चतुर रणनीति का हिस्सा है। यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के कद को और ज्यादा प्राभवी बनाने की एक सोची समझी प्लानिंग है। इसमें कास्ट डायनिमिकस का खास ख्याल रखा गया है। इसके अलावा यह दिखाने का एक प्रयास है कि लोकतंत्र में एक कार्यकर्ता भी ऐसे पद पर पहुंच सकता है।
इसके अलावा राजनीतिक इतिहास को टटोलने का प्रयास करेंगे तो समझ आएगा कि केंद्र में मौजूद सरकार राज्यों में अपनी सरकारों की डोर अपने हाथ में रखना चाहती हैं, ऐसा ही बीजेपी ने भी किया है। बीजेपी के इस फैसले से यह संदेश भी दिया गया है कि पार्टी का संगठन कितना मजबूत है जहां दिग्गज नेता भी आलाकमान के आदेशों को मानते हैं, जबकि कांग्रेस कहीं ना कहीं इस मामले में पिछड़ती रही है।
कांग्रेस को मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत हासिल करने की उम्मीद थी। हालांकि भाजपा ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पांच साल के मौजूदा मुख्यमंत्रियों के खिलाफ चुनाव लड़ते हुए भी भारी जीत हासिल की। भाजपा की चुनाव मशीनरी का जमीनी स्तर पर जुड़ाव और विधायकों से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक के कार्यकर्ताओं के मेहनती प्रयास इस नतीजे का एक प्रमुख कारण बनकर उभरे और भाजपा इस तरह का प्लान बना रही है कि इसे लोकसभा चुनाव तक बरकरार रखा जाए।