पंजाब की सियासत में गुरुवार सुबह उस समय सियासी भूचाल आ गया जब पुलिस ने कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा की गिरफ्तार कर लिया। मामला 2015 का था, SIT की जांच जारी थी, आठ साल तक केस में कोई खास डेवलमेंट नहीं हुआ था। लेकिन फिर अचानक से सुबह साढ़े 5 बजे चंडीगढ़ में पुलिस पहुंची और कांग्रेस विधायक को गिरफ्तार कर लिया गया। अभी के लिए उन्हें दो दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है।
अब गुरुवार को गिरफ्तारी कैसे हुई, ये तो बताया ही जाएगा, लेकिन सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि किस मामले में सुखपाल खैहरा इतना बुरा फंस गए हैं। ये बात साल 2015 की है, पंजाब पुलिस को ऐसे इनपुट मिले थे कुछ लोग 2 किलो हेरोइन, 24 सोने से बिस्कुट, पिस्तौल जैसी चीजें लेकर कहीं जा रहे है। अपने इनपुट पर भरोसा करते हुए पुलिस ने एक्शन लिया और कुल 9 लोगों की गिरफ्तारी हो गई। उनमें तब मार्केट कमेटी ढिलवां के पूर्व चेयरमैन गुरदेव सिंह भी शामिल रहे।
अब शुरुआत में इस केस के साथ कांग्रेस विधायक का कोई कनेक्शन सामने नहीं आया, लेकिन पूछताछ हुई तो पता चला कि गुरदेव सिंह के सुखपाल खैहरा के साथ संबंध रहे। संबंध रहे तो जांच की गई, उस जांच में कुछ ऐसे सबूत मिले जिनसे शक गहरो गया। अब उसी केस में पिछले कई सालों से SIT द्वारा जांच की जा रही थी। ये मामला अकाली सरकार के दौरान हुआ, कांग्रेस सरकार में ज्यादा कुछ नहीं हुआ, लेकिन मान सरकार के सत्ता में आते ही ये बड़ी गिरफ्तारी देखने को मिल गई।
वैसे जिस समय गिरफ्तारी हुई, उस समय कांग्रेस विधायका द्वारा काफी हंगामा किया गया। पहले तो उन्होंने उस पुलिस अधिकारी पहचान जाननी चाही जो उन्हें गिरफ्तार करने आया। पहचान पता चलने के बाद काफी देर तक सुखपाल अरेस्ट वारंट की डिमांड करते रहे। अब इस गिरफ्तारी के इसी पहलू पर विवाद है क्योंकि कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी अरेस्ट वारेंट के उनके नेता को गिरफ्तार कर लिया। खुद सुखपाल खैहरा का दावा रहा कि उन्हें एक गिलास पानी तक पीने नहीं दिया गया और हाथ से ही गिलास छीन लिया गया।
मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस विधायक ने साफ कहा कि बदले की भावना के साथ मान सरकार काम कर रही है। उन्हें एक झूठे केस में फंसाने का काम किया गया है। जिस मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिली हुई है, उसी को फिर खोलकर जबरदस्ती का विवाद खड़ा किया जा रहा है। कांग्रेस ने आधिकारिक बयान में कहा है कि वे इस मामले को अंत तक लड़ने वाले हैं।
वैसे अब यहां ये समझना जरूरी है कि इस समय आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। ये वहीं गठबंधन है जो 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने की कसमें खा रहा है। लेकिन उन कसमों के बीच अभी तक आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के दिल नहीं मिल पाए हैं। दिल्ली में दोनों एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं, मध्य प्रदेश में केजरीवाल का प्रचार शुरू हो चुका है और अब पंजाब में ये सियासी गिरफ्तारी।
दिल्ली कांग्रेस के नेता तो कह भी रहे हैं कि पंजाब में जब इस तरह से गिरफ्तारी की जाएगी तो दिल्ली में बात कैसे बन सकती है। मल्लिकार्जुन खड़गे भी ने भी बोला है कि वे कांग्रेस विधायक के साथ खड़े हैं। अब इस एक गिरफ्तारी का असर सिर्फ पंजाब या दिल्ली तक नहीं रहने वाला है, बल्कि पूरे विपक्ष पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। आगमी बैठकों में क्या अब आम आदमी पार्टी और कांग्रेस साथ दिखेंगे, जानकार तो ये सवाल भी उठाने लगे हैं।