कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जहां खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत के साथ कनाडा के रिश्तों में तल्खी आई है वहीं अब कनाडाई पीएम को बलूच मानवाधिकार परिषद ने आड़े हाथ लिया है। दरअसल ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट करीमा बलोच की रहस्यमय मृत्यु पर जस्टिन ट्रूडो की खामोशी को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं।
बलूच ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ कनाडा (बीएचआरसी) ने करीमा बलोच से जुड़े मामले पर सवाल उठाया है। यह मामला निर्वासित बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता करीमा बलूच के अपहरण और कथित हत्या से जुड़ा है।
करीमा बलोच 2020 में टोरंटो कनाडा में मृत पाई गईं थीं जहां वह पाकिस्तान में आतंकवाद के आरोप लगने के बाद पांच साल तक निर्वासन में रह रही थीं। कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो पर राजनीति करने और करीमा बलोच की मौत को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए बलूच ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ कनाडा (बीएचआरसी) ने शनिवार को कनाडाई पीएम को लिखे एक पत्र में लिखा कि बलूचिस्तान की मानव अधिकार कार्यकर्ता की मौत पर आपकी सरकार शांत क्यों थी?
2016 में बीबीसी ने को करीमा बलोच को उनके काम के लिए ‘बीबीसी 100 महिला 2016’ सूची में शामिल किया था, जिसमें उनका पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी के लिए अभियान शामिल था। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल का उपयोग बलूचिस्तान में लोगों के अपहरण, यातना, जबरन गायब होने और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करने के लिए किया था, जो पाकिस्तान सरकार और सेना द्वारा किए जा रहे थे।
बीएचआरसी ने कनाडाई सरकार की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाया और खासतौर पर पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूचिस्तान में चल रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से निपटने के संबंध में भी कई बातें लिखी। पेंटागन के पूर्व अधिकारी और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो माइकल रुबिन ने करीमा बलोच की मौत पर ट्रूडो की आलोचना की है।
भारत और कनाडा के बीच भी तनातनी फिलहाल बरकरार है। दरअसल कनाडाई पीएम ने खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने की बात कही है। भारत ने हरदीप सिंह निज्जर को 2020 में आतंकवादी घोषित कर दिया था। कनाडाई पीएम के बयान के बाद भारत और कनाडा के बीच काफी तनाव देखा गया है। भारत ने कनाडा के आरोपों को सिरे से नकार दिया है और सख्त टिप्पणी की है।