By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept

Transport News

Latest News From Different Categories

  • Home
  • Transport
  • India
  • Business
  • World
  • Others
    • Insurance
Reading: तवलीन सिंह का कॉलम वक्‍त की नब्‍ज: महिलाओं के बारे में सोच बदलें, तभी भविष्य बदलेगा
Share
Sign In
Notification Show More
Aa
Transport NewsTransport News
Aa
Search
  • Home
    • Home 1
    • Default Home 2
    • Default Home 3
    • Default Home 4
    • Default Home 5
  • Categories
  • Bookmarks
  • More Foxiz
    • Sitemap
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
India

तवलीन सिंह का कॉलम वक्‍त की नब्‍ज: महिलाओं के बारे में सोच बदलें, तभी भविष्य बदलेगा

Admin
Last updated: 2023/09/24 at 8:26 AM
Admin
Share
7 Min Read
Women Reservation Bill | Tavleen Singh |
SHARE

जबसे प्रधानमंत्री ने जी20 शिखर सम्मेलन को सफलता से समाप्त करके एलान किया था कि संसद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा तबसे राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही थीं कि इस सत्र में कौन-सी विशेष चीज होने वाली है। हम पत्रकारों में सहमति थी कि इस विशेष सत्र में बहुत बड़े परिवर्तन का कोई एलान होने वाला है जैसे कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का कानून या कोई ऐसा अहम बदलाव जिसके लिए संविधान में संशोधन की जरूरत पड़ेगी। अब मालूम हुआ है कि इस विशेष सत्र को बुलाया गया था महिला आरक्षण विधेयक पारित करने के लिए। निजी तौर पर मुझे ऐसा लगा कि ऐसा करने के लिए विशेष सत्र की जरूरत नहीं थी।

महिला आरक्षण कानून की चर्चा बरसों से होती आ रही है। सोनिया गांधी ने जब चर्चा में भाग लिया तो याद दिलाया कि इस कानून को मेरे ‘जीवनसाथी’ लाना चाह रहे थे लेकिन ला नहीं पाए। आगे उन्होंने और उनके बेटे ने एक आवाज में कहा कि पिछड़ी जातियों के लिए जब तक खास प्रावधान नहीं रखा जाता है तब तक यह कानून अधूरा रहेगा।

महिलाओं के लिए संसद में 33 फीसद सीटें आरक्षित अगले आम चुनाव के पहले तो नहीं होने वाली हैं, लेकिन नई लोकसभा जब चुनकर आएगी, तो संभव है कि उसमें महिलाओं के लिए आरक्षण आ जाएगा।

इस कानून को इतना समर्थन मिला है राजनीतिक दलों का और महिलाओं का भी कि जो बात अब कहने वाली हूं ज्यादातर लोगों को पसंद नहीं आएगी, लेकिन मेरा मानना है कि इसको कहना पड़ेगा ताकि हम सब इस आरक्षण का मतलब समझ पाएं। पंचायतों में तो महिलाओं के लिए आरक्षण दशकों से है सो मैं जब भी देहाती दौरों पर निकलती हूं और किसी गांव में महिला सरपंच होती हैं तो हमेशा उनसे मिलती हूं। अक्सर मैंने पाया है कि इन महिलाओं की सरपंची सिर्फ नाम के वास्ते है।

इन नाम के वास्ते महिला सरपंचों के कारण प्रधान पति नाम का एक पद भी कई जगह सुनने में आता है। यानी महिला सरपंचों के पतिदेव ज्यादातर गांव चलाने का काम संभालते हैं अपनी पत्नियों के नाम में। इनसे जब भी मैंने पूछा है कि अपनी बीवियों को वो क्यों नहीं काम करने देते हैं तो जवाब मिलता है ये- ‘जी पढ़ी-लिखी नहीं हैं तो समझती नहीं है कि क्या करना है इस पद पर चुने जाने के बाद’।

देखा ये भी है मैंने कि जिन महिलाओं को गांव का प्रधान बनाया जाता है वो होती हैं किसी मर्द सरपंच के रिश्तेदारों में से। ऐसा कहने के बाद लेकिन ये भी कहना जरूरी समझती हूं कि महाराष्ट्र के सांगली जिले में मुझे एक दलित महिला सरपंच मिली थीं बहुत साल पहले जिसने गांव में स्वच्छता अभियान इतनी सफलता से चलाया था कि नालियों में साफ पानी बहने लगा था, कचरे का नामो-निशान नहीं था और बीमारियों को दूर भगा दिया गया था।

उसका नाम था छाया कांबले और इतना कमाल करके दिखाया था इस औरत ने कि मैंने उसपर एक पूरा टीवी प्रोग्राम किया था कोई बीस साल पहले। सो लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण मिलने के बाद अगर छाया कांबले जैसी औरतें पहुंचने लगती हैं तो इस नए कानून से भारत देश की शक्ल बदल सकती है। लेकिन मालूम नहीं क्यों मुझे अभी से लगने लगा है कि ऐसा होने वाला है नहीं और वैसी ही औरतें पहुंचेंगी संसद में जो किसी की बीवी, बेटी या किसी बहन होने के नाते पहुंची हैं।

इनके आने से ना तो देश की महिलाओं का भला होगा और ना देश की राजनीति का। मेरा मानना है कि अपने देश में अगर एक वर्ग है जिसका हाल बाकी वर्गों से कहीं बदतर है तो वो वर्ग है भारत की औरतों का।

देहातों में बेटी के पैदा होने पर न तो खुशियां मनाई जाती हैं और न ही उसकी वो जगह बनती है जो उसके भाइयों की होती है। कानूनी तौर पर उसको बराबर के अधिकार बहुत पहले दिए गए हैं लेकिन इन अधिकारों के मिलने के बाद भी न उसको जमीन-जायदाद में बराबर का हक मिलता है और न ही उसकी पढ़ाई पर वो ध्यान दिया जाता है जो उसके भाइयों की किस्मत में होता है।

थोड़ा बहुत अगर पढ़-लिख लेती है तो गनीमत। घर की चारदिवारी के बाहर नौकरी कर लेती है तो गनीमत। अक्सर भारत की बेटियों को बचपन से ही घर सभालने का काम सौंपा जाता है। अक्सर उनकी किस्मत में यही होता है कि थोड़ी सी बड़ी हो जाती हैं तो उनकी शादी कर दी जाती है। अक्सर उसकी मर्जी के बिना।

क्या संसद में ये आरक्षण मिलने के बाद भारत की औरतों का भविष्य रोशन हो जाएगा? यकीन तो है नहीं लेकिन उम्मीद दिल से करती हूं कि निकट भविष्य में इस देश की महिलाओं का जीवन बिल्कुल बदल जाएगा। विकसित भारत का जो सपना है प्रधानमंत्री का उसको साकार करने के लिए ऐसा होना बहुत जरूरी है।

मोदी बहुत खुशी जताते हैं जब उनको विज्ञान या सेना जैसे क्षेत्रों में महिलाएं दिखती हैं सिर्फ इसलिए कि इन क्षेत्रों में इतनी कम महिलाओं को आने दिया गया है। उनको इन क्षेत्रों से बाहर रखने वाले और कोई नहीं उनके अपने परिजन होते हैं जो अभी तक उस दकियानूसी जमाने में अटक कर रह गए हैं जिसमें राज करते हैं केवल पुरुष।

इस आरक्षण से हमारा पुरुष प्रधान देश अगर बदल जाता है तो बहुत बड़ी बात होगी। इसलिए चाहे जैसे भी हो इस कानून के पारित होने के बाद इसको अमल में जल्दी लाया जाना चाहिए। साथ ही, आशा करती हूं कि संसद के दरवाजे उन महिलाओं के लिए ही खुलेंगे जो वास्तव में संसद में पहुंचने लायक हों।

You Might Also Like

क्या गहलोत-पायलट को राजस्थान की राजनीति से दूर कर रही कांग्रेस? संगठन में फेरबदल किस ओर करते हैं इशारा, जानिए

क्या इंडिया गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं? बंगाल में ममता सरकार को घेरने के लिए BJP के साथ खड़ी दिखी CPIM

West Bengal: ममता बनर्जी के आवास के पास विरोध-प्रदर्शन मामले में 55 महिलाओं को जमानत, 4 को पुलिस रिमांड पर भेजा गया, जानिए पूरा मामला

भारत ने स्वदेशी नौवहन प्रणाली विकसित की

12 नियुक्तियां और सिर्फ एक OBC! खड़गे की नई टीम राहुल गांधी की सियासत पर ना पड़ा जाए भारी

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.
[mc4wp_form]
By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Admin September 24, 2023 September 24, 2023
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article Women Reservation Bill | P. chidambaram | पी. चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर: महिला आरक्षण कब? बाद में, बाद में, बाद में
Next Article prakash singh badal| punjab| India Canada Row: ‘सिख विरोधी बातें बंद करो’, भारत-कनाडा विवाद पर अकाली दल ने दी प्रतिक्रिया
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Stay Connected

235.3k Followers Like
69.1k Followers Follow
11.6k Followers Pin
56.4k Followers Follow
136k Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

ashok gehlot | sachin pilot | congress | rajasthan |
क्या गहलोत-पायलट को राजस्थान की राजनीति से दूर कर रही कांग्रेस? संगठन में फेरबदल किस ओर करते हैं इशारा, जानिए
India December 24, 2023
Arabian Sea | Israel
अरब सागर में भारत की ओर बढ़ रहे इजरायली जहाज पर ड्रोन हमला: रिपोर्ट
World December 24, 2023
mamata banerjee | cpim | bjp | protest |
क्या इंडिया गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं? बंगाल में ममता सरकार को घेरने के लिए BJP के साथ खड़ी दिखी CPIM
India December 24, 2023
West Bengal | MAMATA BANRJEE | teaching job
West Bengal: ममता बनर्जी के आवास के पास विरोध-प्रदर्शन मामले में 55 महिलाओं को जमानत, 4 को पुलिस रिमांड पर भेजा गया, जानिए पूरा मामला
India December 24, 2023
Follow US
© 2023 Copyright. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?