Airbus C-295: भारतीय वायु सेना के बेड़े में एक और दमदार ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल होने वाला है। स्पेन के सेवील में एयरबस कंपनी ने भारतीय वायुसेना को पहला C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सौंपा दिया है। इस विमान को स्पेन से लेने के लिए खुद वायु सेना प्रमुख वीआर चौधरी पहुंचे हैं। C-295 विमान 25 सितंबर को उत्तर प्रदेश की हिंडन एयरबेस पर पहुंचेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस विमान को औपचारिक रूप से वायु सेना के बेड़े में शामिल करेंगे।
भारत सरकार ने दो साल पहले एयरबस कंपनी के साथ 56 विमानों की डील की थी। इनमें से 16 विमान स्पेन से आने थे। वहीं बारी 40 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इनका निर्माणगुजरात के वड़ोदरा में किया जाएगा। Airbus कंपनी समझौते के तहत 4 साल में 16 विमान देगी। रक्षा अधिकारियों ने जानकारी दी है कि भारत को दूसरा C-295 विमान मई 2024 तक मिलेगा। भारतीय वायु सेना को 16 विमान अगस्त 2025 तक मिल जाएंगे। वहीं भारत का पहला स्वदेशी C-295 विमान साल 2026 तक मिल पाएगा। अन्य 39 स्वदेशी विमान 2031 तक बनकर तैयार होने की संभावना है। भारत ने यह डील 21 हजार करोड़ में की थी।
C-295 विमान में शॉर्ट टेक-ऑफ और लैंडिंग की क्षमता है। यह विमान 844 मीटर के रनवे से उड़ान भर सकता है। वहीं इस विमान को लैंड करने के लिए सिर्फ 420 मीटर लंबे रनवे की जरुरत होती है। C-295 विमान लगातार 11 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम है। इस विमान को हवा में ही रिफ्यूल किया जा सकता है। C-295 विमान को पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से उतारा जा सकता है। यह विमान 9250 किलो तक का वजन उठाने में सक्षम है। इस विमान में दो इंजन हैं और विमान 482 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। C-295 विमान एक इंजन की मदद से 13 हजार 533 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। वहीं दोनो इंजन की मदद से यह 30 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है। बता दें कि C-295 विमान एक ट्रांसपोर्ट विमान है जो नौ टन के पेलोड के साथ 71 सैनिक को ले जाने में सक्षम है।
C-295 एक टैक्टिकल विमान के रूप में मुख्य हवाई क्षेत्रों से देश के सीमा के नजदीक संचालित हवाई क्षेत्रों तक सैनिकों और राशन ले जाने में सक्षम है। यह छोटी और संकीर्ण हवाई पट्टियों पर भी आसानी से काम कर सकता है क्योंकि यह शॉर्ट टेक-ऑफ और लैंडिंग में सक्षम है। एयरबस का कहना है कि यह केवल 2,200 फीट लंबी छोटी हवाई पट्टियों से काम कर सकता है और 110 नॉट की कम गति से उड़ान भरने वाले सामरिक मिशनों के लिए कम स्पीड पर भी आसानी से संचालन कर सकता है।
एयरबस के अनुसार C-295 ब्राजील के जंगलों और दक्षिण अमेरिका में कोलंबियाई पहाड़ों, मध्य पूर्व में अल्जीरिया और जॉर्डन के रेगिस्तान और यूरोप में पोलैंड और फिनलैंड की ठंडी जलवायु में आसानी से संचालित होता है। यह विमान चाड, इराक और अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों में भी उड़ान भर चुका है।