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‘सुप्रीम कोर्ट और उसके जजों को सरकार के लिए फंड जुटाने की जरूरत नहीं है’, जस्टिस SK कौल बोले- न्यायाधीश दें साहस का परिचय

Admin
Last updated: 2023/12/16 at 2:56 PM
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4 Min Read
Supreme Court | justice Sanjay Kishan Kaul | Sanjay Kishan Kaul
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Justice Sanjay Kishan Kaul: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट और उसके जज सरकार के लिए “फंड संग्रहकर्ता” नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी मामले में लगने वाले जोखिमों की तुलना में कानून के सिद्धांत अधिक महत्वपूर्ण हैं।

जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा कि अगर जज लोकतंत्र में अन्य संस्थानों से साहस दिखाने की उम्मीद करते हैं तो उन्हें साहसी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के पास उनका समर्थन करने के लिए संवैधानिक संरक्षण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि न्यायाधीश साहस का प्रदर्शन नहीं करते हैं, तो अन्य संस्थानों के लिए इसका पालन करना मुश्किल होगा।

कौल ने व्यक्तियों और समुदायों के बीच घटती सहिष्णुता पर भी बात की और व्यक्तियों के बीच समझ और स्वीकृति बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “एक समाज के रूप में हमें एक-दूसरे के प्रति सहिष्णुता रखनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहिष्णुता कम हो गई है और अब समय आ गया है कि मानव प्रजातियां एक-दूसरे के साथ रहना सीखें, ताकि दुनिया रहने के लिए एक छोटी जगह नहीं, बल्कि एक बड़ी जगह बन जाए।”

न्यायाधीश अपनी सेवानिवृत्ति के दिन सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) के साथ औपचारिक पीठ के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत एक व्यक्तिगत सिद्धांत साझा करते हुए की। जस्टिस कौल को 25 दिसंबर को पद छोड़ना है। हालांकि, शुक्रवार उनके कार्यालय का आखिरी दिन था, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट 18 दिसंबर से शीतकालीन अवकाश पर है। यह जनवरी के पहले सप्ताह में फिर से खुलेगा।

जस्टिस कौल ने ‘स्थगन संस्कृति’ के बारे में भी अपनी चिंता व्यक्त की और जोर देकर कहा कि सूचीबद्ध मामलों को तुरंत सुना जाना चाहिए। एक युवा न्यायाधीश के रूप में मिली शुरुआती सलाह पर विचार करते हुए कौल ने वादियों को न्याय का पूरा उपाय प्रदान करने की जिम्मेदारी पर जोर दिया, क्योंकि कोर्ट ही उनका अंतिम भरोसा है। इसके अलावा कौल ने खुद की यात्रा की जिक्र करते किया।

जस्टिस कौल श्रीनगर के मूल निवासी हैं। उनका जन्म 26 दिसंबर, 1958 को हुआ। 1982 में उन्होंने एक वकील के रूप में शुरुआत की। उन्होंने अपना ध्यान मुख्य रूप से दिल्ली उच्च न्यायालय और भारत के सुप्रीम कोर्ट के वाणिज्यिक, सिविल, रिट, मूल और कंपनी क्षेत्राधिकार पर केंद्रित किया।

कौल को 3 मई 2001 को दिल्ली हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। 2003 में वह स्थायी न्यायाधीश बने थे। इसके बाद, उन्होंने सितंबर 2012 में दिल्ली हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस की भूमिका निभाई।

जून 2013 में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ चस्टिस के रूप में नियुक्त किया गया। इसके बाद 26 जुलाई, 2014 को उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का पदभार संभाला। 17 फरवरी, 2017 को उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त किया गया था।

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Admin December 16, 2023 December 16, 2023
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