दिल्ली में ठंडक बढ़ रही है लेकिन रैन बसेरों (शेल्टर होम्स) की स्थिति काफी खराब है। दिल्ली में दांडी पार्क में स्थित रैन बसेरे में जुलाई में आई बाढ़ का असर अभी भी है। ये रैन बसेरा आमतौर पर काफी बड़ा है और इसमें एक मोहल्ला क्लिनिक भी है। लेकिन इसी वर्ष जुलाई में बाढ़ आने के कारण यहां पर लोगों को रहने में काफी दिक्कत आ रही है।
शेल्टर होम का देखभाल करने वाले विक्की चंदेल ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, “हमारे पास बिजली के बिल हैं जिनका भुगतान अगस्त से नहीं किया गया है। यहां पर जुलाई से भोजन नहीं मिल रहा है। बाढ़ के बाद से DUSIB की ओर से शेल्टर होम स्थल के लिए बहुत कम या कोई मदद नहीं की गई है। अगर कुछ निवासियों और मैंने इस जगह की सफाई नहीं की होती, तो आप अभी भी यहां टखने तक गहरे कीचड़ में चल रहे होते। यहां सब राम भरोसे चलता है।”
शेल्टर होम में रहने वाले 56 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर अब्दुल कयूम ने कहा, “गद्दे और कंबल अभी भी मिट्टी और रेत में सने हुए हैं। हममें से कुछ लोग उपयोग के लिए अपने गद्दे और कंबल स्वयं खरीदा। अन्य लोग गंदे कंबल और गद्दे धोते हैं और उसपे सोते हैं।”
वहीं लोगों के अनुसार कुछ लोग राहगीरों से कंबल हासिल करने की आशा में भी सड़कों पर सोना पसंद करते हैं। दिहाड़ी मजदूर श्रीराज नायर ने कहा “सर्दियों के महीनों के दौरान बहुत से लोग गरीबों को कंबल दान करने आते हैं। जब किसी को कंबल मिलता है, तो वे सोने के लिए शेल्टर होम में वापस आ जाते हैं।
दांडी पार्क में स्थित शेल्टर होम कभी अपने परिसर में पांच केबिनों में लगभग 800 लोगों को रखने में सक्षम हुआ करता था। पांच में से एक केबिन बुजुर्ग बेघरों को समर्पित था जबकि बाकी सामान्य लोगों के लिए थे। विक्की चंदेल ने कहा कि आज पांच में से दो बिजली बिल बकाया होने के कारण बंद हैं।
डीयूएसआईबी अधिकारियों के अनुसार, “शेल्टर होम के यमुना बाढ़ क्षेत्र में होने के कारण इसका संचालन रोक दिया गया है।” एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में आश्रय स्थल के परिसर में बेघरों के लिए तंबू लगाए गए थे, लेकिन कुछ मुद्दों के कारण कुछ दिनों बाद उन्हें हटा दिया गया।