By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept

Transport News

Latest News From Different Categories

  • Home
  • Transport
  • India
  • Business
  • World
  • Others
    • Insurance
Reading: KCR का भविष्य: तेलंगाना गंवाने के बाद थर्ड फ्रंट की कोशिश या इंडिया गठबंधन के साथ समझौता?
Share
Sign In
Notification Show More
Aa
Transport NewsTransport News
Aa
Search
  • Home
    • Home 1
    • Default Home 2
    • Default Home 3
    • Default Home 4
    • Default Home 5
  • Categories
  • Bookmarks
  • More Foxiz
    • Sitemap
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
India

KCR का भविष्य: तेलंगाना गंवाने के बाद थर्ड फ्रंट की कोशिश या इंडिया गठबंधन के साथ समझौता?

Admin
Last updated: 2023/12/10 at 1:47 AM
Admin
Share
7 Min Read
KCR
SHARE

तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की राजनीति इस समय एक बड़े सियासी झटके से उबरने की कोशिश कर रही है। बीआरएस ने अपना इकलौता राज्य तेलंगाना कांग्रेस के हाथों गंवा दिया है। 10 साल तक सरकार चलाने के बाद केसीआर को इस राज्य में हैट्रिक दोहराने का मौका नहीं मिला। ये चूक अब सिर्फ तेलंगाना तक सीमित नहीं रह गई है, नेशनल लेवल पर इसका असर दिखने लगा है।

यहां ये समझना जरूरी है कि केसीआर लंबे समय से लोकसभा चुनाव के लिए थर्ड फ्रंट बनाने की बात कर रहे थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने एक नहीं कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात की, उन्हें समझाने का भी प्रयास रहा। उनके थर्ड फ्रंट के जरिए कांग्रेस को भी बेदखल करने की तैयारी थी। अब कागज पर केसीआर की तैयारी काफी अच्छी थी क्योंकि अगर तेलंगाना में जीत मिल जाती तो ये कहना गलत नहीं होता कि केसीआर की स्वीकार्यता बढ़ रही है और आगे चलकर वे राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

राजनीति में ये बात भी मायने रखती है कौन नेता कितने सालों तक किसी राज्य में शासन करता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि नरेंद्र मोदी 12 सालों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, कहने को वे भी उस समय एक राज्य तक सीमित थे, लेकिन उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी थी। इसका कारण ये था कि वे एक राज्य के सीएम थे, ऐसे में उनसे कई नेता मिलते थे, उनकी एक अहमियत बनी रहती थी। इसी तरह अगर ओडिशा जाया जाए तो वहां तो अभी भी नवीन पटनायक का शासन है। उनकी भी छवि अब एक सशक्त नेता की बन चुकी है।

अब इन्हीं नेताओं के जैसा करिश्मा केसीआर करना चाहते थे, लेकिन असल में ऐसा हो नहीं पाया है। उन्होंने अपनी पार्टी का नाम जरूर बदलकर टीआरएस से बीआरएस कर लिया, लेकिन उनकी पहुंच राष्ट्रीय नहीं हो पाई है। इसके ऊपर उन्हें तेलंगाना में जो ये हार मिली है, ये अप्रत्याशित है। इसका एक कारण तो ये भी माना जा रहा है कि उन्होंने क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा होने पर ज्यादा फोकस किया, इसी वजह से वे अपना ही राज्य गंवा बैठे। बड़ी बात ये भी है कि वे खुद कामारेड्डी से चुनाव हार गए, यानी कि राष्ट्रीय स्तर पर तो जनाधार कमजोर था ही, तेलंगाना में भी पिच कुछ टूट सी गई है।

अब आगामी लोकसभा चुनाव में के चंद्रशेखर राव के सामने चुनौती काफी बड़ी है। एक तरफ हाल ही में जीती कांग्रेस खड़ी है तो दूसरी तरफ राज्य की आठ सीटें निकालने वाली बीजेपी भी मजबूत दिखाई पड़ रही है। जानकार मानते हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में कई सीटें ऐसी भी रह सकती हैं जहां पर मुकाबला कांग्रेस बनाम बीजेपी का बन जाए और बीआरएस कहीं पीछे छूट जाए। इस स्थिति से तो केसीआर हर कीमत पर बचना चाहते हैं, वे दस साल तक सरकार चलाने के बाद अपनी पार्टी की ऐसी दुर्गति नहीं देख सकते।

इसी वजह से सवाल ये उठता है कि क्या केसीआर थर्ड फ्रंट का सपना छोड़कर इंडिया गठबंधन से हाथ मिला लेंगे? अब इस सवाल का जवाब एक बार के लिए केसीआर की तरफ से हां भी हो सकता है क्योंकि उस विपक्षी कुनबे में कई ऐसे नेता शामिल हैं जिन्हें वे खुद अपने थर्ड फ्रंट का हिस्सा बनाना चाहते थे। अखिलेश यादव से लेकर अरविंद केजरीवाल तक इस समय इंडिया गठबंधन के साथ बने हुए हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या ये है कि कांग्रेस ही बीआरएस को लेकर सहज नहीं रहने वाली है।

जिस तरह से बंगाल में ममता को लेफ्ट से समस्या है, कुछ वैसा ही हाल तेलंगाना में कांग्रेस और बीआरएस के बीच चल रहा है। राहुल गांधी ने तो कई सभाओं में जिस तरह से केसीआर और उनकी पार्टी को निशाने पर लिया है, जिस तरह से बार-बार उन्हें बीजेपी की बी टीम कहा है, उस स्थिति में तो उनका इंडिया गठबंधन में शामिल होना काफी मुश्किल है। इसके ऊपर इंडिया गठबंधन में अगर वे शामिल हो भी गए तो तेलंगाना में उन्हें ज्यादा सीटें मिलना मुश्किल रहने वाला है। हाल ही में जनता का जबरदस्त गुस्सा इस पार्टी ने देखा है, ऐसे में किसी भी सूरत में इंडिया गठबंधन वो गुस्सा अपनी उम्मीदों पर पानी फेरने नहीं दे सकता।

वैसे के चंद्रशेखर राव के पास एक विकल्प एनडीए के साथ जाने का भी खुला हुआ है। कांग्रेस तो वैसे भी लंबे समय से उनकी पार्टी को बीजेपी से जोड़कर ही देख रही है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यहां पर ये आने वाली है कि बीजेपी के साथ जाने के लिए केसीआर को अपने राष्ट्रीय सपनों की कुर्बानी देनी पड़ जाएगी। उस स्थिति में वे दूसरे राज्यों तक अपना विस्तार नहीं कर पाएंगे। उनकी सियासी सीमाएं सिर्फ तेलंगाना तक रह जाएंगी और वहां भी उन्हें बीजेपी के साथ अच्छी-खासी सीटें शेयर करनी पड़ेंगी। उस स्थिति में एक पार्टी के लिहाज केसीआर के लिए ये बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।

यानी कि इंडिया गठबंधन के दरवाजे लगभग बंद चल रहे हैं, बीजेपी में जाने के लिए बड़ी कुर्बानी देनी पड़ेगी, इधर कुआ उधर खाई वाली स्थिति चल रही है। एक तेलंगाना हार ने केसीआर को अजीब असमंजस में डाल दिया है, उन्हें उनका सियासी भविष्य ही धुंधला दिखाई देने लगा है। वैसे ये अलग बात है कि केसीआर ने कई बार असफलताओं से सीखकर मजबूत वापसी भी की है। तेलंगाना बनाने के लिए जो आंदोलन चला था, तब उनकी सशक्त और हार ना मानने वाली छवि ने बता दिया था- नेता में तो दम है।

You Might Also Like

क्या गहलोत-पायलट को राजस्थान की राजनीति से दूर कर रही कांग्रेस? संगठन में फेरबदल किस ओर करते हैं इशारा, जानिए

क्या इंडिया गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं? बंगाल में ममता सरकार को घेरने के लिए BJP के साथ खड़ी दिखी CPIM

West Bengal: ममता बनर्जी के आवास के पास विरोध-प्रदर्शन मामले में 55 महिलाओं को जमानत, 4 को पुलिस रिमांड पर भेजा गया, जानिए पूरा मामला

भारत ने स्वदेशी नौवहन प्रणाली विकसित की

12 नियुक्तियां और सिर्फ एक OBC! खड़गे की नई टीम राहुल गांधी की सियासत पर ना पड़ा जाए भारी

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.
[mc4wp_form]
By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Admin December 10, 2023 December 10, 2023
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article ANIMAL ‘सभी को राम-राम…’, CM रेस के बीच क्या शिवराज ने पहले ही दे दिया अपना विदाई संदेश?
Next Article Uttarakhand GIS | Uttarakhand Global Investor Summit छत्तीसगढ़ में विधायक दल की बैठक आज, बीजेपी लगाएगी CM के नाम पर मुहर! राजस्थान-मध्य प्रदेश को करना होगा इंतजार
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Stay Connected

235.3k Followers Like
69.1k Followers Follow
11.6k Followers Pin
56.4k Followers Follow
136k Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

ashok gehlot | sachin pilot | congress | rajasthan |
क्या गहलोत-पायलट को राजस्थान की राजनीति से दूर कर रही कांग्रेस? संगठन में फेरबदल किस ओर करते हैं इशारा, जानिए
India December 24, 2023
Arabian Sea | Israel
अरब सागर में भारत की ओर बढ़ रहे इजरायली जहाज पर ड्रोन हमला: रिपोर्ट
World December 24, 2023
mamata banerjee | cpim | bjp | protest |
क्या इंडिया गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं? बंगाल में ममता सरकार को घेरने के लिए BJP के साथ खड़ी दिखी CPIM
India December 24, 2023
West Bengal | MAMATA BANRJEE | teaching job
West Bengal: ममता बनर्जी के आवास के पास विरोध-प्रदर्शन मामले में 55 महिलाओं को जमानत, 4 को पुलिस रिमांड पर भेजा गया, जानिए पूरा मामला
India December 24, 2023
Follow US
© 2023 Copyright. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?