Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तरकाशी सिल्कयारा सुरंग में फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए अब इंडियन आर्मी ने मोर्चा संभाल लिया है। श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए एक के बाद एक कई मुस्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऑगर मशीन के फिर से फंसने के बाद मैनुअल ड्रिलिंग की प्लानिंग बनाई गई है। ट्रेंचलेस कंपनी के तकनीशियनों की टीम मैनुअल ड्रिलिंग का काम करेगी। हालांकि, तकनीशियन पहले 900 मिमी स्टील पाइप के 20 मीटर क्षेत्र से ऑगर मशीन के टूटे हुए हिस्से को हटाएंगे। इस काम में लगभग पूरा दिन लगेगा।
सिल्कयारा सुरंग के मलबे में फंसी ऑगर मशीन को काटने के लिए रविवार सुबह हैदराबाद से एक प्लाज़्मा कटर मशीन को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बचाव स्थल पर भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि मशीन को एक निजी कंपनी की चार्टर उड़ान से शनिवार रात दो बजे आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी हवाई अड्डे से देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे पर लाया गया।
माइक्रो-टनलिंग विशेषज्ञ क्रिस कूपर के मुताबिक, प्लाज्मा मशीन ऑगर मशीन के स्टील को तेजी से काटने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि हम अभी भी ऑगर मशीन को काट रहे हैं। इस बीच, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ऑगर मशीन की कटिंग जल्द ही पूरी होने की उम्मीद है, जिसके बाद अधिकारी फंसे हुए श्रमिकों को बचाने के लिए मैन्युअल ड्रिलिंग शुरू करेंगे।
इससे पहले सिल्कयारा में धंसी निर्माणाधीन सुरंग में ‘ड्रिल’ करने में इस्तेमाल ऑगर मशीन के ब्लेड मलबे में फंसने से काम बाधित हो गया था। जिसके बाद दूसरे विकल्पों पर विचार किए जाने के बीच शनिवार को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ने उम्मीद जताई कि पिछले 14 दिन से फंसे 41 श्रमिक अगले महीने क्रिसमस तक बाहर आ जाएंगे। शुक्रवार को लगभग पूरे दिन ‘ड्रिलिंग’ का काम बाधित रहा। हालांकि समस्या की गंभीरता का पता शनिवार को चला जब सुरंग मामलों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने मीडिया को बताया कि ऑगर मशीन ‘खराब’ हो गई है।
ऑगर मशीन से काम बाधित होने के इस घटनाक्रम ने फंसे हुए श्रमिकों के परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। घटनास्थल के आसपास ठहरे हुए परिजन बचाव कर्मियों से श्रमिकों को लेकर बात कर रहे हैं। श्रमिकों को छह इंच चौड़े पाइप के जरिए खाना, दवाइयां और अन्य जरूरी चीजें भेजी जा रही हैं। पाइप का उपयोग करके एक संचार प्रणाली स्थापित की गई है और श्रमिकों के रिश्तेदारों ने उनसे बात की है। इस पाइप के माध्यम से एक एंडोस्कोपिक कैमरा भी सुरंग में डाला गया है, जिससे बचावकर्मी अंदर की स्थिति देख पा रहे हैं।
सिल्कयारा-बारकोट निर्माणाधीन सुरंग के अंदर फंसे 41 श्रमिकों को बचाने के प्रयास युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। बचाव अभियान आज 15वें दिन प्रवेश कर चुका है। मजदूर 12 नवंबर से मलबे के एक विशाल ढेर के पीछे फंसे हुए हैं।