श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर भेंट कर उन्हें भगवान श्रीरामलला विग्रह के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का औपचारिक निमंत्रण दिया। यह समारोह 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में होगा। बयान में कहा गया है कि पौष शुक्ल द्वादशी, विक्रम संवत 2080 (22 जनवरी 2024) को इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ देश के चार हजार से अधिक संत एवं 2,500 प्रतिष्ठित अतिथि उपस्थित रहेंगे।
आमंत्रण स्वीकार करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर कहा, ”आज जीवन धन्य हो गया है। मन आह्लादित है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सम्मानित पदाधिकारी स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज, चम्पत राय जी एवं राजेंद्र पंकज जी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्री रामलला सरकार के नूतन बालरूप विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुझे आमंत्रित किया है। आभार! जय जय सीताराम।”
सरकार की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नवनिर्मित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला विग्रह के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। ‘एक्स’ पर एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, ”प्रभु राम की असीम अनुकंपा, पूज्य संतों एवं दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज व पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी महाराज के आशीर्वाद, श्रद्धेय अशोक सिंघल एवं रामभक्तों के सदियों के अनवरत संघर्ष तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का ही सुफल है कि अयोध्या में प्रभु राम के नूतन बालरूप विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा को सफलीभूत होते हुए हम सभी देख पा रहे हैं। कृतज्ञ हूं, हर्षित हूं, उत्साहित हूं, राममय हूं।”
अयोध्या में राम मंदिर बनकर तैयार होने वाला है। अगले वर्ष 22 जनवरी को विधि विधान के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर का उद्घाटन करेंगे, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए इसे खोल दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर धन्नीपुर में अभी तक मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है, जिसे लेकर मुस्लिम समुदाय में नाराजगी है। बाबरी मस्जिद के मुख्य पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने इस मामले में सरकार से दखल देने की अपील की है तो वहीं कई मुस्लिम बुद्धिजीवी चाहते हैं कि इस मस्जिद की आधारशिला भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों ही रख जाए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुस्लिम समुदाय को मस्जिद के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन दी गई थी। इस दौरान जहां राम मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया तो वहीं मस्जिद निर्माण के लिए इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन बनाया गया था। आज मंदिर का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने को है, लेकिन मस्जिद निर्माण का कोई अता-पता नहीं है। इससे मुस्लिम समुदाय काफी निराश है।
इकबाल अंसारी ने कहा कि देश दुनिया के लोग सवाल पूछते हैं कि मस्जिद निर्माण में इतनी देरी क्यों है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और प्रधानमंत्री प्राण प्रतिष्ठा के लिए भी आ रहे हैं, लेकिन मस्जिद के लिए कोई एक ईंट भी रखने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर ट्रस्टी ईमानदार होते तो काम शुरू हो गया होता। इसलिए हमारी मांग है कि सरकार ट्रस्ट पर नजर रखे और शीघ्र इसका काम शुरू हो। ट्रस्ट के लोगों पर अब लोग शक करने लगे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ट्रस्टी बदल दें।