ईडी ने राशन वितरण घोटाले को लेकर पश्चिम बंगाल के मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक के ठिकानों पर बृहस्पतिवार तड़के से छापेमारी शुरू की तो दोपहर होते होते ममता बनर्जी का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। लेकिन ममता के साथ तृणमूल ने भी मोइत्रा पर लगे आरोपों से खुद को दूर कर लिया है। उन पर संसद में अडानी समूह को निशाना बनाने के लिए तैयार किए गए सवाल पूछने के लिए 2 करोड़ रुपये नकद लेने का आरोप है। पार्टी ने पिछले हफ्ते कहा था कि वह एथिक्स कमेटी की जांच के बाद उचित निर्णय लेगी।
ममता ने कहा कि क्या अत्याचार चल रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले देशभर में विपक्षी नेताओं पर ईडी छापे के नाम पर भाजपा गंदा खेल खेल रही है। वो पूछना चाहती हैं कि भाजपा के किसी नेता के आवास पर क्या ऐसी एक भी छापेमारी हुई है। खास बात है कि पश्चिम बंगाल की सीएम ने अपनी सांसद महुआ मोइत्रा का जिक्र तक नहीं किया। जबकि महुआ को लोकसभा की समिति ने पैसे के बदले सवाल पूछने के मामले में तलब कर लिया है। घटनाक्रमों से साफ है कि लोकसभा समिति महुआ पर शिकंजा कस रही है। तृणमूल के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा था कि संबंधित सदस्य को मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया है। पार्टी लोकसभा समिति की जांच के नतीजों का इंतजार कर रही है।
ममता बनर्जी ने केंद्र पर निशाना साधते हुए विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ ईडी की छापेमारी को एक गंदा राजनीतिक खेल करार दिया। ममता ने कहा कि मोहम्मद बिन तुगलक की तरह भाजपा कई गलत निर्णय लेकर देश के इतिहास को बदलने का प्रयास कर रही है। इनमें नोटबंदी और जीएसटी लागू करना शामिल है। ममता ने कहा कि भाजपा कहती है कि वह सबका साथ सबका विकास’ चाहती है। लेकिन वास्तव में इसका मतलब ‘सबका साथ सबका सत्यनाश है।
मुख्यमंत्री ने मल्लिक के कोलकाता स्थित आवास पर छापेमारी के दौरान उन्हें कुछ भी होने पर भाजपा और ईडी के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज करने की धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि ज्योतिप्रिय मल्लिक अस्वस्थ हैं। यदि ईडी की छापेमारी के दौरान उन्हें कुछ हुआ तो मैं केस दर्ज कराऊंगी।