इजरायल और हमास के बीच में पिछले 10 दिनों से भीषण युद्ध जारी है। इस युद्ध में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है, कई घायल हैं। लाखों लोग अपने देश को छोड़ हमेशा के लिए जा चुके हैं। लेकिन अभी भी जमीन पर स्थिति विस्फोटक बनी हुई है, आलम ये चल रहा है कि कई दूसरे देश भी इस युद्ध में कूदने की तैयारी कर रहे हैं। इस समय फिलिस्तीन के समर्थन मे ईरान द्वारा लगातार बयानबाजी की जा रही है।
ईरान के विदेश मंत्री ने दो टूक कह दिया है कि अगर गाजा पर्टी पर इजरायल ने अपने हमले नहीं रोके तो आने वाले दिनों में कार्रवाई देखने को मिल सकती है। वहां के सुप्रीम लीडर ने तो धमकी देते हुए साफ कर दिया है कि दुनिया के मुसलमानों को कोई नहीं रोक पाएगा। अब ईरान पहला ऐसा मुस्लिम देश है जो खुलकर इजरायल के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कर रहा है। इससे पहले तक कई दूसरे मुस्लिम देशों ने इजरायल की निंदा तो की है, लेकिन खुलकर हमास का समर्थन भी नहीं हुआ है।
अब ईरान का जैसा इतिहास रहा है, जिस तरह से उसने समय-समय पर हमास के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाई हैं, उसकी विचारधारा को समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है। कुछ समय पहले तक ईरान के विदेश मंत्री हमास के नेताओं से मुलाकात कर रहे थे। आरोप तो यहां तक लगे हैं कि हमास ने इजरायल पर जो हमला किया था, उसमें ईरान की भी भूमिका रही। ये अलग बात है कि ईरान ने उन आरोपों को सिरे से खारिज करने का काम कर दिया है।
लेकिन कई ऐसी रिपोर्ट सामने आई हैं जो बताती हैं कि हमास के आतंकियों को जो ट्रेनिंग दी जा रही थी, हथियारों को खरीदने का जो पैसा आ रहा था, उसका सीधा कनेक्शन ईरान के साथ रहा। यानी कि अटकलें ये चल रही हैं कि ईरान ने खुद को आगे से इस साजिश में छिपाकर रखा, लेकिन हमास को लगातार मदद देता रहा।
वैसे ईरान की भूमिका को हल्के में इसलिए भी नहीं लिया जा सकता क्योंकि जो मुस्लिम देशों का संगठन है, उसमें उसकी आवाज काफी बुलंद मानी जाती है। दुनिया के बड़े मुस्लिम देशों के संगठन को Organisation of Islamic Cooperation (OIC) कहा गया है। इस समय जब इजरायल और हमास के बीच में जंग छिड़ी हुई है, एक नहीं कई मौकों पर ईरान ने अपनी तरफ से एक मीटिंग होस्ट करने की बात कही है। यानी कि ईरान तो इजरायल के खिलाफ नेतृत्व देने को खड़ा है, वो हर कीमत पर नेतनयाहू की सरकार को घेरना चाहता है।
बड़ी बात ये भी है कि जिस साउदी अरब के साथ ईरान के कई सालों तक रिश्ते तल्ख रहे हैं, वहां भी दोनों देशों के नेताओं ने गाजा की स्थिति पर फोन पर लंबी बातचीत कर ली है। इस साल मार्च में ही दोनों देशों के बीच में फिर व्यापार का चैनल खुला था, उसके बाद ये पहली बातचीत रही।