नोबल पुरस्कार-2023 की शुरुआत हो चुकी है। फिजियोलॉजी/मेडिसिन में 2023 का नोबेल पुरस्कार कैटालिन कारिको और ड्रू वीसमैन दिया गया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार न्यूक्लियोसाइड बेस संशोधनों से संबंधित उनकी खोजों के लिए दिया गया है। इस खोज ने COVID-19 के खिलाफ प्रभावी mRNA टीकों के विकास को सक्षम किया है।
The 2023 Nobel Prize in Physiology or Medicine awarded to Katalin Karikó and Drew Weissman for their discoveries concerning nucleoside base modifications that enabled the development of effective mRNA vaccines against COVID-19.
(Pic: The Nobel Prize) pic.twitter.com/4BCKyOiidX
नोबेल असेंबली ने कहा, “अपने अभूतपूर्व निष्कर्षों के जरिए जिसने mRNA- Messenger RiboNucleic Acid इम्यून सिस्टम के साथ कैसे संपर्क करता है इस बारे में हमारी समझ को मौलिक रूप से बदल दिया है। पुरस्कार विजेताओं ने आधुनिक समय में मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक के दौरान टीका विकास की अभूतपूर्व दर में योगदान दिया है।”
यह प्रतिष्ठित पुरस्कार नोबेल असेंबली द्वारा हर साल दिया जाता है जिसमें कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के 50 प्रोफेसर शामिल होते हैं, जो उन वैज्ञानिकों को मान्यता देते हैं जिन्होंने मानव जाति के बेहतरीन काम में योगदान दिया है।
कैटालिन कारिको जिनका जन्म 1955 में हंगरी के Szolnok में हुआ था। वह Szeged University में प्रोफेसर हैं और University of Pennsylvania के पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन में सहायक प्रोफेसर हैं। इस बीच ड्रू वीसमैन वैक्सीन रिसर्च में रॉबर्ट्स फैमिली प्रोफेसर और आरएनए इनोवेशन के लिए पेन इंस्टीट्यूट के निदेशक हैं।
1901 से अब तक फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 113 नोबेल पुरस्कार दिए गए हैं, जिनमें से 12 महिलाओं को दिए गए हैं। अब तक के सबसे कम उम्र के मेडिसिन पुरस्कार विजेता फ्रेडरिक जी बैंटिंग हैं, जिन्हें 32 साल की उम्र में इंसुलिन की खोज के लिए 1923 मेडिसिन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
पिछले वर्ष पर नजर डालें तो फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2022 का नोबेल पुरस्कार स्वीडिश आनुवंशिकीविद् Svante Paabo को दिया गया था। वह जर्मनी के लीपज़िग में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इवोल्यूशनरी एंथ्रोपोलॉजी का निर्देशन करते हैं, उनके शोध ने विलुप्त हो रहे होमिनिन और मानव विकास के बारे में हमारी समझ को काफी बेहतर बनाया है।
1901 में अपनी स्थापना के बाद से नोबेल पुरस्कार उन वैज्ञानिकों को दिया जाता रहा है जिन्होंने मानव जाति के फायदे के लिए सबसे महत्वपूर्ण खोजें की हैं।