पाकिस्तान की नजदीकी अमेरिका से लगातार बढ़ रही है। ये बात हाल ही में एक सीक्रेट रिपोर्ट से सामने आई थी जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी मदद हासिल करने के लिए पाकिस्तान ने यूक्रेन को हथियार बेचे। जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व पीएम तो सरेआम ये बात कह चुके हैं कि अमेरिकी इशारे पर सेना ने उनको कुर्सी से हटाया था। फिलहाल अमेरिका से नजदीकी के चलते चीन ने पाकिस्तान से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
चीन ने अरबों डॉलर की लागत वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत ऊर्जा, जल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में सहयोग का और विस्तार करने से इनकार कर दिया है। यह बात दोनों देशों के बीच दोस्ती में तनाव का संकेत देती है। पैसे के संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर में कोयला आधारित बिजली संयंत्र स्थापित करने के मसले पर चीन की कई मांगें मान भी ली थीं।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने सीपीईसी की 11वीं संयुक्त सहयोग समिति की बैठक का जिक्र कर यह खबर जारी की। जेसीसी, सीपीईसी की रणनीतिक निर्णायक इकाई है। इसकी 11वीं बैठक पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज)-नीत सरकार के जोर देने पर पिछले साल 27 अक्टूबर को वर्चुअल तरीके से हुई थी। हालांकि, बैठक के मसौदे पर करीब एक साल बाद 31 जुलाई को चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग की यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। खबर के अनुसार, इससे दोनों पक्षों में मतभेद सामने आ गया है, जिसकी वजह से सहमति बनने में बहुत देरी हुई है।
पाकिस्तान के योजना मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच बैठकों के ब्योरे पर विचार-विमर्श करके और आम-सहमति बनाकर ही हस्ताक्षर करने की एक परंपरा है। खबर के अनुसार, बीजिंग ने पाकिस्तान के साथ जो अंतिम मसौदा साझा किया और दोनों पक्षों ने बैठक के जिस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, उनमें अंतर हैं। इसमें कहा गया है कि सीपीईसी के तहत ऊर्जा, जल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ाने पर चीन की असहमति तनाव को दर्शाती है।