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एलियन के सच से क्‍या उठेगा पर्दा ? अनजाने ग्रह की रहस्यमयी दुनिया

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Last updated: 2023/09/22 at 11:22 AM
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10 Min Read
Alian| research
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अभिषेक कुमार सिंह

‘एलियन’ के वजूद में भरोसा रखने वालों के नजरिये से देखें तो कहा जा सकता है कि इस ब्रह्मांड में असंख्य आकाशगंगाएं हैं, इसलिए यह सोचना सांख्यिकीय तर्क के हिसाब से सही हो सकता है कि उनमें कहीं न कहीं जीवन हो। लेकिन पिछले कई दशकों से दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जो जवाब खोजा था, वह यही है कि ब्रह्मांड में इंसान अकेला है। इस उत्तर को मुकम्मल नहीं मानने की एक वजह यही रही कि इस काम में तकनीकी सीमाएं थीं।

दशकों से दुनिया भर के वैज्ञानिक इस सवाल से जूझते रहे हैं कि क्या इस ब्रह्मांड में हमसे भी अधिक बुद्धिमान कोई सभ्यता मौजूद है? हाल में, इसकी चर्चा मैक्सिको में संसदीय सुनवाई के दौरान पेश किए गए ‘गैर-इंसानी जीव’ के दो शवों के सोशल मीडिया पर प्रसारण के साथ एक बार फिर उठ खड़ी हुई है।

ऐसा पहला अवसर है जब परग्रही सभ्यताओं (एलियंस) के कथित सबूतों के साथ मैक्सिको की संसद में आधिकारिक रूप से धरती के बाहर जीवन की संभावना का उल्लेख किया गया। सलेटी-भूरे रंग के ममीकृत इन शवों का चेहरा-मोहरा काफी हद तक इंसानों जैसा है। इन कथित सबूतों के साथ पूरी दुनिया में इस सवाल को लेकर नई बहस छिड़ गई है कि क्या अंतरिक्ष में जीवन की इस खोज का कोई महत्त्व है?

‘एलियन’ के वजूद का संकेत करते मैक्सिको की संसद में दिखाए गए ममीकृत शव अठारह सौ साल पुराने हैं, जिन्हें जेमी मासन नाम के एक विवादित मैक्सिकी पत्रकार और शोधकर्ता ने छह साल पहले 2017 में पेरू के कुस्को से खोज निकालने का दावा किया है। हालांकि मैक्सिको की संसद में मासन ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ये पृथ्वी से बाहर के प्राणियों के शव हैं, पर ऐसा लगता है कि ये इंसान नहीं हैं।

इन शवों के अठारह सौ साल पुराने होने का खुलासा नेशनल आटोनोमस यूनिवर्सिटी आफ मैक्सिको द्वारा किए गए रेडियो कार्बन डेटिंग विश्लेषण से हुआ है। इस विश्वविद्यालय के भौतिकी संस्थान ने बयान जारी कर पुष्टि की है कि उसने उम्र का पता लगाने के लिए परीक्षण किए, लेकिन इसका कोई परीक्षण नहीं हुआ कि इन जीवों की उत्पत्ति कहां हुई। शायद यही वजह है कि बहुत से वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने मैक्सिको में किए गए दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

ऐसा भी कई बार हो चुका है, जब दावे के साथ कहा गया कि एलियंस या उनके यानों को देखा गया, उनके विचरण को दर्ज किया गया। जैसे एक दावा यह है कि इसी वर्ष जुलाई, 2023 में अमेरिकी संसदीय समिति से एक पूर्व खुफिया अधिकारी ने कहा था कि ब्रह्मांड में इंसान अकेला नहीं है और अमेरिकी अधिकारी सबूतों को छिपा रहे हैं। उधर हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजंसी- नासा ने सैकड़ों अज्ञात उड़न यान (यूएफओ) देखे जाने की घटनाओं की छानबीन पर आधारित छत्तीस पेज की अपनी एक रपट में दावा किया है कि इन घटनाओं के पीछे एलियंस का हाथ होने का कोई सबूत नहीं मिला है।

मगर नासा ने यह भी कहा है कि अब यह एजंसी आधुनिक तकनीक और कृत्रिम मेधा की मदद से यूएपी यानी ‘अनआइडेंटिफाइड एनोमेलस फेनोमेना’ की जांच करेगी। इससे यह साफ हो सकेगा कि जो चीजें हमारे सौरमंडल से गुजर कर पृथ्वी तक आई हैं, उनके पीछे असल में कौन है। भले ही इस रपट में एलियंस के वजूद पर कोई निर्णायक टिप्पणी नहीं है और यह सवाल अनुत्तरित छोड़ दिया गया है कि ब्रह्मांड में कहीं और जीवन है या नहीं। मगर रपट में इस बात से भी इनकार नहीं किया गया है कि पृथ्वी के वायुमंडल में आकर कोई संभावित अज्ञात परग्रही तकनीक (एलियन टेक्नोलाजी) काम नहीं कर रही है।

ऐसा क्यों है कि परग्रही सभ्यता और ‘यूएफओ’ के बारे में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पा रहा है? इसका एक समझदार जवाब वर्ष 2016 में शोध जर्नल ‘एस्ट्रोबायोलाजी’ में प्रकाशित हुआ था। इसमें अंतरिक्ष विज्ञानी आदित्य चोपड़ा और चार्ली लाइनवीवर ने निष्कर्ष दिया था कि पृथ्वी से परे अन्य ग्रहों पर जीवन के लायक हालात ही नहीं हैं, लिहाजा उन पर एलियंस तो क्या, कैसा भी जीवन संभव नहीं है। ये नतीजे सामने आने के बाद सवाल यह है कि क्या अब अंतरिक्ष में ऐसी खोजों का कोई महत्त्व रह गया है?

यह भी सच है कि बीते कई दशकों में एलियंस की खोज कहीं नहीं पहुंची है, लेकिन भौतिकशास्त्री स्टीफन हाकिंग समेत कई विशेषज्ञ इस धारणा के धुर समर्थक रहे हैं कि ब्रह्मांड में कहीं न कहीं इंसानों जैसी या उससे भी ज्यादा बुद्धिमान सभ्यता मौजूद है। चूंकि यह ब्रह्मांड बहुत विशाल है, उसके अंतहीन कोनों में हमारी पहुंच बहुत सीमित है और शायद एलियंस ने अपनी ओर से कोई ऐसा संदेश हमें नहीं भेजा है, जिसे सुना या देखा जा सके, इसलिए उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं की जा सकी है। यह भी संभव है कि पृथ्वी के पार जो जीवन है, वह अलग किस्म का हो। या फिर हमारी ओर से एलियंस की खोजबीन की जो कोशिशें हो रही हैं, वे आधी-अधूरी या उनकी तकनीकी सीमाएं हैं। शायद इसीलिए हमारा किसी परग्रही सभ्यता से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।

दरअसल, हाकिंग का विश्वास था कि ब्रह्मांड के दूसरे ग्रहों में प्राणी अवश्य हैं और लोगों को उनसे बचकर रहना चाहिए। नासा भी हाकिंग की राह पर चलता रहा है। उसने इसके लिए पहले ‘सेटी’ (सर्च फार एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलीजेंस) जैसा व्यापक अभियान चलाया। उससे जब कुछ नहीं मिला तो 2015 से ‘नेक्सस’ (नेक्सस फार एक्सोप्लैनेट सिस्टम साइंस) नामक अभियान की शुरुआत की।

कहा जा रहा है कि एलियंस का सबसे ज्यादा खतरा अमेरिकियों को महसूस होता है। उन्हें यह डर सताता है कि कहीं उनसे भी ज्यादा काबिल और ताकतवर लोग कहीं बाहर से आकर इस धरती पर कब्जा न करें और पृथ्वी के संसाधनों पर अपना हक जता दें। इसलिए बाहरी ताकतों से बचने के नाम पर अरबों डालर खर्च कर डालने में भी उन्हें कोई उज्र नहीं होता।

‘एलियन’ के वजूद में भरोसा रखने वालों के नजरिये से देखें तो कहा जा सकता है कि इस ब्रह्मांड में असंख्य आकाशगंगाएं हैं, इसलिए यह सोचना सांख्यिकीय तर्क के हिसाब से सही हो सकता है कि उनमें कहीं न कहीं जीवन हो। लेकिन पिछले कई दशकों से दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जो जवाब खोजा था, वह यही है कि ब्रह्मांड में इंसान अकेला है।

इस उत्तर को मुकम्मल नहीं मानने की एक वजह यही रही कि इस काम में तकनीकी सीमाएं थीं। पहले दुनिया के पास न तो ताकतवर टेलीस्कोप थे और न ही वैसे ‘सिग्नल’ पकड़ने वाले यंत्र, जो अंतरिक्ष से आने वाली हर सूक्ष्म आहट को एक अलग प्रकार के जीवन की तरफ से संवाद की कोशिश के रूप में दर्ज कर सकें। दूसरी बड़ी खामी इस मान्यता से जकड़े रहना था कि दूसरी दुनिया भी हमारी पृथ्वी जैसी होगी और उस पर इंसान जैसे जीव यानी एलियंस ही बसते होंगे।

मगर आधुनिक तकनीक के सहारे भी सौरमंडल के दोनों ग्रहों यानी मंगल और शुक्र पर अभी तक न तो जीवन के कोई संकेत मिले और न ही इसकी कोई संभावना नजर आई है कि इन पर भविष्य में भी जीवन संभव हो सकता है। तकरीबन ऐसी ही समस्याएं सौरमंडल के अन्य ग्रहों और उनके चंद्रमाओं पर रही है। अंतरिक्ष में अब तक जहां तक नजर गई है, वहां जीवन की शून्य संभावना ही मिली है।

कहीं बेहद ऊंचे या अत्यधिक कम दाब और तापमान तो कहीं जहरीली गैसों की मौजूदगी ने इंसान या बैक्टीरिया आधारित जीवन की संभावनाओं को पलीता लगा रखा है।चूंकि अब तक का तकनीकी ढांचा पृथ्वी से परे कैसे भी जीवन संकेत को खोज नहीं पाया है, लिहाजा बेहतरी इसी में है कि एलियंस के खोज और संपर्क का काम छोड़ दिया जाए और इसे उन्हीं के यानी एलियंस के हवाले छोड़ा जाए कि वही बताएं कि वे हैं।

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