भारत में जी20 समिट का आयोजन काफी सफल रहा, पूरी दुनिया में ये चर्चा का विषय बना और सभी से खूब तारीफ भी मिली। तारीफ का एक कारण ये भी रहा कि भारत ने अपनी मजूबत कूटनीति के दर्शन दे दिए। जिस तरह से बिना रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ना लिए रूस-यूक्रेन युद्ध पर अहम टिप्पणी की गई, इसे हर किसी ने नोटिस किया। लेकिन यूक्रेन में राष्ट्रपति जेलेंस्की के सहालकार को भारत का ये अंदाज रास नहीं आया है। वहां से जो बयान सामने आया है, वो हर भारतीय को नाराज कर जाएगा।
जेलेंस्की के सलाहकार मिखाइलो पोडोल्याक ने एक जारी बयान में कहा कि आप जानते, भारत, चीन और तुर्की जैसे देशों के साथ दिक्कत क्या है। वो इस बात विश्लेषण ही नहीं कर पाते कि वो जो कर रहे हैं, उसका आगे जाकर क्या असर रहने वाला है। सच्चाई ये है कि इन देशों की बौद्धिक क्षमता कुछ कम होती है। भारत ने चंद्रयान जरूर लॉन्च कर दिया है, लेकिन ये समझ लेना कि वो आधुनिक दुनिया को पूरी तरह समझने लगे हैं, ये गलत है।
अब भारत में यूक्रेन का जो दूतावास है उसने खुद को उस बयान से तुरंत दूर कर लिया है। सभी इसे मिखाइलो पोडोल्याक का निजी बयान बता रहे हैं। बड़ी बात ये है कि इस बयान के बाद जब मिखाइलो पोडोल्याक बुरा फंस गए तो उन्होंने सामने से आकर कह दिया कि रूसी प्रोपेंगाडा के तहत उनके बयान को ट्विस्ट करके दिखाया गया। वैसे यूक्रेन को जो मिर्ची लगी है, उसका कारण ये है कि जी20 का इस बार का जो दिल्ली घोषणा पत्र था, वो सर्वसहमति से पारित हो गया।
उस घोषणा पत्र में पुतिन का कही कोई जिक्र नहीं था, बस कूटनीति और बातचीत के जरिए युद्ध को रोकने की बात कही गई थी। वहीं शब्दों में हेरफेर करते हुए हर जगह ‘यूक्रेन में चल रहे युद्ध’ का इस्तेमाल किया गया, कहीं भी ये नहीं लिखा गया- यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध। जानकार मानते हैं कि भारत के इस रुख ने रूस और यूक्रेन के बीच में तो बैलेंलिंह बैठा दी, लेकिन राष्ट्रपति जेलेंस्की इससे ज्यादा की उम्मीद लगाकर बैठे थे।