विधायकों की सैलरी (MLA Salary) पर हर साल हमारे देश में बहस होती है। हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने राज्य के विधायकों की सैलरी में हर महीने 40 हजार रुपये का इजाफा किया है। अब पश्चिम बंगाल में हर विधायक को सैलरी के रूप में हर महीने 1.21 लाख रुपये मिलेंगे। टीएमसी सरकार द्वारा किए गए इजाफे से बंगाल के विधायक सैलरी के मामले में नीचे से तीसरे नंबर पर आते थे। इजाफे के बाद वह नीचे से 12वें नंबर पर हैं।
राज्य सरकारें अपने विधायकों की सैलरी और भत्ते खुद तय करती हैं। ज्यादातर राज्यों में मुख्यमंत्री, कैबिनेट मिनिस्टर और विपक्ष के नेताओं को आम विधायकों से ज्यादा सैलरी मिलती है। महंगाई के हिसाब से विधायकों की सैलरी और भत्ते में इजाफा भी होता रहता है। ज्यादातर मामलों में सैलरी व भत्तों में इजाफे की सिफारिश कमेटी द्वारा की जाती है।
सैलरी के अलावा विधायकों को उनके क्षेत्र में किए जाने वाले काम के लिए, सहायकों की भर्ती के लिए और टेलीफोन बिलों के लिए भी भत्ते दिए जाते हैं। इसके अलावा विधायक सरकारी आवास, देशभर में मुफ्त यात्रा, मेडिकल सेवाओं तक पहुंच और वाहन खरीदने के लिए लोन सहित तमाम सुविधाओं का फायदा उठाते हैं। आइए नजर डालते हैं विभिन्न राज्यों में विधायकों को मिलने वाली सैलरी।
राज्य विधानसभाओं और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के सभी राज्यों में विधायकों की सैलरी के विश्लेषण से पता चलता है कि इस साल अगस्त में एक समिति द्वारा विधायकों की सैलरी में बढ़ोतरी के बाद झारखंड के विधायक अब हर महीने 2.9 लाख रुपये सैलरी के हकदार हैं। हालांकि इस बढ़ोतरी को अभी विधानसभा से मंजूरी मिलनी बाकी है।
झारखंड के बाद नंबर आता है महाराष्ट्र का, यहां विधायक की सैलरी 2.6 लाख रुपये प्रति महीने है। महाराष्ट्र के बाद तेलंगाना और मणिपुर के विधायकों को सैलरी के रूप में 2.5 लाख रुपये मिलते हैं। भारत में ऐसे राज्यों की संख्या 8 है, जहां पर विधायकों को हर महीने सैलरी के रूप में 2 लाख रुपये से ज्यादा दिए जाते हैं।
बात अगर सबसे कम सैलरी की करें तो देश में 5 राज्य ऐसे हैं जहां विधायकों की सैलरी 1 लाख रुपये से कम है। ऐसे राज्यों में भी केरल सबसे नीचे है। केरल में विधायक को सैलरी के रूप में 70 हजार रुपये प्रति महीने मिलते हैं। देश की राजधानी नई दिल्ली में विधायकों की सैलरी में पिछले साल ही 67 फीसदी का इजाफा हुआ है लेकिन फिर भी दिल्ली के विधायक सैलरी के मामले में नीचे से चौथे नंबर पर आते हैं।
बात अगर खर्चे के हिसाब से करें तो यूपी विधायकों की सैलरी (UP MLA Salary) पर खर्च करने के मामले में सबसे ऊपर है क्योंकि यहां 403 MLA हैं। यूपी में विधायकों को सैलरी देने के लिए हर साल राज्य सरकार को 90.4 करोड़ रुपये खर्च करती है। इस मामले में पुडुचेरी का खर्च सबसे कम है। वहां सिर्फ 33 विधायक हैं और सरकार साल में सिर्फ 4.2 करोड़ रुपये अपने विधायकों की सैलरी के ऊपर खर्च करती है।
केरल (140 विधायक), असम (126) और पंजाब (117) देश की उन बड़ी विधानसभाओं में हैं, जहां विधायकों की सैलरी पर अपेक्षाकृत कम खर्च होता है। इन राज्यों में सैलरी पर राज्य सरकार क्रमशः 11.8 करोड़ रुपये, 12.1 करोड़ रुपये और 13.2 करोड़ रुपये खर्च करती हैं।
झारखंड में 81 विधायक हैं, अगर यहां विधायकों की सैलरी में प्रस्तावित इजाफा होता है तो वहां राज्य सरकार को हर साल सैलरी देने के लिए 28 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। मणिपुर सरकार अपने 60 विधायकों को सैलरी देने के लिए करीब 18 करोड़ रुपये सालाना खर्च करती है।
देश के विधायकों की औसत सैलरी 1.5 लाख रुपये महीना है। बात अगर सांसदों की करें तो केंद्र सरकार हर संसद सदस्य के ऊपर 2.7 लाख रुपये महीना खर्च करती है। बिहार अपने विधायकों को सैलरी (Bihar MLA Salary) देने के मामले में 10वें नंबर पर आता है लेकिन इस राज्य औसत आय (पर कैपिटा इनकम) के मामले में देश में सबसे नीचे है।