अदालतों में जिन विधायकों और सांसदों पर किसी अपराध में दोष साबित हो जाता है तो, उनके चुनाव लड़ने पर सुप्रीम कोर्ट से आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। सांसदों-विधायकों के खिलाफ आपराधिक केस से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एमिकस क्यूरी बनाए गए वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दोषी नेताओं के चुनाव लड़ने पर छह साल का नहीं आजीवन प्रतिबंध लगे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश होने वाली अपनी रिपोर्ट में हंसारिया ने कहा, “सांसद और विधायक आमजन की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करते हैं और एक बार नैतिक अधमता से जुड़ा अपराध करते हुए पाए जाने पर, उन्हें उस पद को संभालने से स्थायी रूप से अयोग्य ठहराया जाना चाहिए।”
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी विजय हंसारिया ने अपनी 19वीं रिपोर्ट दाखिल की। इस दौरान कोर्ट में एमिकस क्यूरी ने रिपोर्ट में इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि अगर कोई नेता दोषी है तो उसके चुनाव लड़ने पर 6 साल के बैन के बजाए आजीवन प्रतिबंध लगाया जाना चहिए। दरअसल, एमिक्स क्यूरी सांसद और विधयकों के खिलाफ लंबित मामलों का तेजी से निपटाने की निगरानी कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुच्छेद 8 को चुनौती दी गई है। एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 और लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद स्थायी अयोग्यता और/या वैधानिक कार्यालय धारण करने से हटाने का प्रवधान है।
एमिकस क्यूरी ने रिपोर्ट में कहा है कि धारा 8 के तहत अपराध को गंभीरता और गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 में प्रावधान है कि अयोग्यता रिहाई के बाद से केवल छह साल की अवधि के लिए होगी। दोषी और व्यक्ति रिहाई के छह साल बाद चुनाव लड़ने के लिए पात्र है, भले ही उसे बलात्कार जैसे जघन्य अपराध या नशीली दवाओं से निपटने या आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने या भ्रष्टाचार में शामिल होने के लिए दोषी ठहराया गया हो।
हंसारिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं और कुल 5175 लंबित मामलों में से 2116 से अधिक मामले, यानी 40%, 5 साल से अधिक समय से लंबित हैं। देशभर में सांसदों और विधायकों के खिलाफ अलग-अलग हाई कोर्ट में 1377 पेंडिंग केसेज के साथ उत्तर प्रदेश पहले नंबर है। पूरे देश के मौजूदा और पूर्व सांसदों और विधायकों पर हुए एक चौथाई क्रिमिनल केस अकेले यूपी से हैं। इस लिस्ट 546 केसों के साथ बिहार दूसरे नंबर पर है।
ये आंकड़े सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी की दागी प्रतिनिधियों पर पेश 19वीं रिपोर्ट के हैं। दरअसल, बीजेपी नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की 2016 में दाखिल जनहित याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट इन मामलों के जल्द निपटारे को मॉनिटर कर रहा है।