Kim Jong Un: उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग मंगलवार को अपनी आलीशान ट्रेन से रूस पहुंचे। उनके साथ अन्य राजनयिकों और सैन्य कमांडरों के अलावा आर्म्स इंडस्ट्री के टॉप अधिकारी भी शामिल हैं। इस दौरे में किम जोंग उन और पुतिन के बीच बातचीत का मुद्दा पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते मजबूत करना होगा। इसके अलावा दोनों देश अमेरिका की चुनौती से निपटने को लेकर भी रणनीति बना सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, किम रूस के बंदरगाह शहर व्लादिवोस्तॉक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे।
अगर किम और पुतिन की मुलाकात होती है तो यह उत्तर कोरियाई नेता की पिछले चार साल से अधिक समय में पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा होगी। यह कोरोना महामारी के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा होगी। किम 2019 में अपनी पिछली विदेश यात्रा में पुतिन के साथ अपने पहले शिखर सम्मेलन के लिए व्लादिवोस्तोक ही गए थे। उनकी यह यात्रा तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता विफल रहने के बाद हुई थी। उस समय वो ट्रेन से व्लादिवोस्तोक पहुंचे थे।
उत्तर कोरिया के तानाशाह जिस ट्रेन से रूस पहुंचे हैं। उसके बाद कई लोगों के मन में सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर किम जोंग उन हवाई यात्रा करने की जगह ट्रेन से सफर करना क्यों पसंद करते हैं?
न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार, ‘किम जोंग उन के पिता का नाम किम जोंग इल और उनके दादा का नाम किम इल सुंग था, लेकिन दोनों हवाई यात्रा से डरते थे। यह डर संभवतः तब पैदा हुआ जब किम जोंग इल और किम इल सुंग ने एक उड़ान के दौरान अपने जेट में विस्फोट देखा था। इस घटना के बाद किम इल सुंग 1986 में एक बार सोवियत संघ गए थे। यह आखिरी बार था जब उत्तर कोरियाई नेता ने तीन दशकों से अधिक समय में हवाई मार्ग से विदेश यात्रा की थी।
कहा जाता है कि किम जोंग उन स्विट्जरलैंड में अपने बोर्डिंग स्कूल के दिनों के दौरान लगातार उड़ान भरते थे, लेकिन 2011 में पदभार संभालने के बाद से उन्होंने हवाई यात्रा लगभग बंद कर दी। 2018 में आखिरी बार वह तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मुलाकात के लिए सिंगापुर हवाई जहाज से ही गए थे। कई लोगों का मानना है कि किम जोंग उन का ट्रेन से यात्रा करने के पीछे का कारण अपने परिवार की परंपरा का पालन करना और अपने बड़ों के प्रति सम्मान दिखाना हो सकता है।
रॉयटर्स के मुताबिक, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की वही ट्रेन है, जिसको उनके पिता और दादा इस्तेमाल करते थे। ट्रेन में फर्नीचर और कॉन्फ्रेंस की व्यवस्था है। ट्रेन में 21 बुलेटप्रूफ गाड़ियां रहती हैं। उन के काफिले में दो ट्रेनें चलती हैं। करीब 100 सुरक्षा कर्मियों को संभावित खतरों से निपटने के लिए स्टेशनों पर आगे भेजा जाता है, जबकि अन्य ट्रेनों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए स्टेशनों पर बिजली बंद कर दी जाती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि किम जोंग उन की ट्रेन इतनी भारी है कि यह 59 किमी/घंटा से अधिक नहीं चल सकती है। मजबूती के मामले में इसकी तुलना लंदन की हाई-स्पीड ट्रेन से की जाती है, जो लगभग 200 किमी प्रतिघंटा और जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन 320 किमी. प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती है।
किम की ट्रेन का नाम ताईयांघो है। यह शब्द सूर्य के लिए इस्तेमाल होने वाला कोरियाई शब्द है। इसे उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल सुंग से भी जोड़ा जाता है। ट्रेन से लंबी दूरी की यात्राएं करने का रिवाज किम जोंग उन के दादा किम इल सुंग ने शुरू किया था। वो वियतनाम और पूर्वी एशिया के देशों की यात्रा पर अपनी ट्रेन से जाते थे। किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल ने उत्तर कोरिया पर 1994 से 2011 तक शासन किया था।