दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन समाप्त हो चुका है। सम्मेलन में शामिल नेता वापस लौट चुके हैं, लेकिन सऊदी के क्राउन प्रिंस अब भी दिल्ली में मौजूद हैं। G2O समिट के लिए नई दिल्ली आए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद आज भारत की स्टेट विजिट पर हैं। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद सोमवार को राष्ट्रपति भवन में एक औपचारिक स्वागत समारोह में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य मंत्रियों से भी मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन में उन्हें सेरेमोनियल वेलकम दिया गया। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रिसीव किया। ये उनकी दूसरी स्टेट विजिट है। विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, मोहम्मद बिन सलमान 9 और 10 को जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद भारत का राजकीय दौरा करेंगे। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस 3 दिन की राजकीय यात्रा पर भारत आए हैं। आज उनकी यात्रा की तीसरा दिन है।
सोमवार को दिल्ली में भारत और सऊदी अरब के बीच भारत-सऊदी निवेश समझौते के तहत कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। भारत-सऊदी निवेश फोरम नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। यह मंच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधान मंत्री मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद की भारत की आधिकारिक राजकीय यात्रा के मौके पर हो रहा है।
पीएम मोदी और प्रिंस सलमान आज हैदराबाद हाउस में मिलेंगे, जहां दोनों के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होगी। इस दौरान भारत-सऊदी रणनीतिक साझेदारी परिषद को लेकर भी करार होगा। शाम 6.30 बजे क्राउन प्रिंस की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात और आधिकारिक फोटो सेशन होगा। जिसके बाद सोमवार रात 8.30 बजे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊदी सऊदी अरब के लिए रवाना होंगे।
मोहम्मद बिन सलमान साल 2019 में भी भारत के राजकीय दौरे पर आए थे। उसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब का दौरा किया था, जिसमें दोनों नेताओं ने इंडिया-सऊदी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल स्थापित की थी, जिस पर आज हस्ताक्षर हो सकते हैं। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस की भारत की यह दूसरी राजकीय यात्रा है। जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान सऊदी अरब ने भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच एक मेगा भारत-मध्य पूर्व-यूरोप शिपिंग और रेलवे कनेक्टिविटी कॉरिडोर शुरू करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट की लागत सभी देश मिलकर वहन करेंगे।