भारत में जी-20 बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप मेगा आर्थिक कॉरिडोर की शुरुआत करने की घोषणा की हैं। इस परियोजना में भारत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, यूरोपीय संघ, फ्रांस, इटली, जर्मनी और अमेरिका शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा कि यह डील होना एक बड़ी बात हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में यह इकॉनोमिक कॉरिडोर विकसीत देशों को बहुत महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाएगा।
पीएम मोदी ने एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद कहा कि आज हम सभी एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक साझेदारी पर पहुंचे हैं। आने वाले समय में यह भारत, मिडिल इस्ट और यूरोप के बीच आर्थिक एकीकरण का एक प्रमुख माध्यम होगा। पीएम मोदी ने कहा कि यह कॉरिडोर पूरी दुनिया की कनेक्टिविटी और सतत विकास को नई दिशा देगा।
यह प्रोजेक्ट रेल और शिपिंग कॉरिडोर ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट (PGII) के लिए साझेदारी का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट में विकासशील देशों में बुनियादी ढांचा को मजबूत करने का है। इस परियोजना में जी-7 देश एक साथ मिलकर एक सहयोगात्मक प्रयास करेंगे। PGII प्रोजेक्ट को चीन के बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव का विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
इस कॉरिडोर को यूरोप, मिडिल ईस्ट और एशिया के बीच रेलवे और समुद्र के जरिए जोड़ा जाएगा। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का अहम उद्देश्य कमर्शियल हब को जोड़ना, स्वच्छ ऊर्जा के विकास और निर्यात का समर्थन करना और समुद्र के नीचे केबल बिछाना, ऊर्जा ग्रिड और दूरसंचार लाइनों का विस्तार करना है।
भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकनोमिक कॉरिडोर की मदद से विकाशील देश के बीच में खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिलेगा। एमओयू के अनुसार इस कॉरिडोर में भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ने वाला एक ईस्ट कॉरिडोर और अरब की खाड़ी को यूरोप से जोड़ने वाला एक नॉर्थ कॉरिडोर शामिल होगा।
इस प्रोजेक्ट में एक रेलवे नेटवर्क की सुविधा होगी जो मौजूदा समुद्री और सड़क मार्गों के पूरक के रूप में होगा। मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट से होकर गुजरने वाले इस रेलवे मार्ग में बिजली के केबल और स्वच्छ हाइड्रोजन पाइपलाइन बिछाने की योजनाए भी शामिल की गई हैं। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य ऊर्जा उत्पादों सहित शामिल देशों के बीच अधिक व्यापार को सक्षम बनाना है। इस प्रोजेक्ट को चीन के विशाल बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव प्रोजेक्ट के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव प्रोजेक्ट के तहत चीन ने दुनिया के अधिकांश हिस्सों को चीन की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की थी।
राष्ट्रपति बाइडेन के प्रमुख उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन फाइनर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कॉरिडोर को विकसित करने के तीन प्रमुख कारण हैं। सबसे पहले इससे ऊर्जा और डिजिटल संचार के बढ़ते प्रवाह के माध्यम से शामिल देशों के बीच समृद्धि बढ़ेगी। दूसरा यह परियोजना कम और मध्यम आय वाले देशों में विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी से निपटने में मदद करेगा। तीसरा यह मिडिल ईस्ट में चल रही अशांति और असुरक्षा को खत्म करने में सहायता करेगा।