राजमार्गों से धन जुटाने के लिए नीति आयोग ने पेश किए मॉडल

राष्ट्रीय राजमार्गों को वित्तीय हिसाब से ज्यादा कुशल बनाने के लिए नीति आयोग ने कुछ विकल्प सुझाए हैं, जिनका इस्तेमाल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) कर सकते हैं। इसमें विकास शुल्क वसूलना और राजमार्गों के किनारे सुविधाएं देने में हिस्सेदारी शामिल है।

यह विचार वैल्यू कैप्चर फाइनैंसिंग मॉडल का हिस्सा है, जिसका सुझाव सरकार के थिंक टैंक ने दिया था। इस मॉडल के तरह सार्वजनिक बुनियादी ढांचा तैयार करने वल आने वाली पूरी लागत या उसका एक हिस्सा निजी भूमि मालिकों या एनएचएआई के मामले में राज्य से लिया जाना शामिल है, जिनकी भूमि का मूल्य बढऩे से उन्हें लाभ पहुंचता है, जबकि एजेंसी उस पर पूरा निवेश करती है। एनएचएआई द्वारा इस मद में किए जाने वाले खर्च की वसूली का प्रस्ताव है।

एक अधिकारी ने कहा कि नीति आयोग एनएचएआई के साथ मिलकर काम कर रहा है, जिससे वित्तीय स्थिरता और परियोजना की व्यावहारिकता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में नीति आयोग ने कई मॉडल सुझाए हैं, जिनमें से कुछ एनएचएआई लागू करेगा। इसमें टोल ऑपरेट ट्रांसफर (टीओटी) सहित संपत्ति के मुद्रीकरण की तकनीक और बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) के माध्यम से राजस्व जुटाना शामिल है। इन दोनों विचारों पर एनएचआई ने जोर दिया है।

यह भी सिफारिश की गई है कि वैल्यू कैप्चर फाइनैंस (वीसीएफ) को एनएचएआई की परिजनाओं में लगाया जाएगा। वीसीएफ के माध्यम से गैर टोल राजस्व को कई तरीकों से बढ़ाया जा सकता है, जिसमें खाली भूमि पर कर, विशेष आकलन कर, विकास अधिकारों का हस्तांतरण (टीडीआर) और लैंड पूलिंग आदि शामिल है।

इसमें यह भी सिफारिश की गई है कि अतिरिक्त राजस्व जुटाने के अन्य साधनों जैसे आईडीएफ, एनएचएआई एलए बॉन्ड का भी विकल्प अपनाया जा सकता है। परियोजना विशेष के लिए एसपीवी बनाने की भी सिफारिश की गई है। वैल्यू कैप्चर फाइनैंस और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) पर भी एक मसौदा नीतिगत खाका भी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सहित कई मंत्रालयों को भेजा गया है। इस दस्तावेज मे वैल्यू कैप्चर फाइनैंस के माध्यम से राजस्व बढ़ाने के कई तरीके बताए गए हैं और अगर यह व्यवहार में आता है तो इससे एनएचएआई की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।

टीओडी खासकर अहम है, जहां परियोजनाओं के आसपास वाणिज्यिक, आवासीय और संस्थानात्मक हिसाब से योजनाबद्ध बुनियादी ढांचा विकास होता है। इसके अलावा वीसीएफ का एक हिस्सा लैंड बॉन्ड है, जिसकी योजना एनएचएआई ने राज्यों से अधिग्रहीत भूमि के भुगतान के लिए बनाई है। इस व्यवस्था के तहत एनएचएआई भूमि अधिग्रहण के एवज में पहले भुगतान नहीं करेगा।

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