ऑटो स्क्रेपेज नीति सुधार की शुरुआत का विकल्प है

14 अरब डॉलर की पूंजी वाले जेएसडब्ल्यू गु्रप के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने पवन लाल के साथ बातचीत में शेयर पुनर्खरीद, जेएसडब्ल्यू स्टील की विस्तार योजनाओं पर अपने ताजा कदम आदि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से एक सख्त ऑटो स्क्रेपेज नीति सुधार की राह में मददगार साबित होगी। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

आपको अर्थव्यवस्था में किस तरह के बदलाव की संभावना है?

भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक भू-राजनीति से जुड़ी हुई है और पिछले साल के दौरान इसमें बड़ा बदलाव आया। अमेरिका-चीन व्यापारिक टकराव के साथ साथ यूरोप और जापान में कमजोर वृद्घि दर्ज की गई। यह वर्ष चुनौतीपूर्ण रहा और कई अर्थव्यवस्थाओं को दबाव का सामना करना पड़ा।

उस संदर्भ में, अगले पांच साल में 4.5 करोड़ टन सालाना के लक्ष्य की राह पर जेएसडब्ल्यू स्टील के लिए किस तरह की चुनौतियां देख रहे हैं?

हमारा लक्ष्य समान बना हुआ है और सरकार ने अर्थव्यवस्था में सुधार के कदम उठाए हैं। यदि हम 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं तो हमें कम से कम 7 से 8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्घि की जरूरत होगी। बुधवार को कई सुधारों की घोषणा की गई। सरकार खनिकों के लिए 100 कोयला ब्लॉकों का व्यावसायीकरण करेगी। दिलचस्प बात यह है कि हम लगभग 15 अरब डॉलर मूल्य के 15 करोड़ टन तापीय कोयले का आयात करते हैं। यह हास्यास्पद है, क्योंकि हम अरबों टन कोयले के भंडार पर बैठे हैं और फिर भी इसका आयात कर रहे हैं।

क्या हमारे अपने स्वयं के और आयातित कोयले की गुणवत्ता में अंतर है?

कोकिंग कोयले के साथ गुणवत्ता में अंतर है। हमारे पास तापीय कोयला प्रचुर मात्रा में है, लेकिन इसका आयात हो रहा है। इसी तरह, 2020 में लौह अयस्क खदानों की नीलामी के बाद बड़ा कीमत अंतर आएगा और इसका इस्पात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। दो साल की अवधि के लिए लौह अयस्क खदानों की सभी वन और पर्यावरण मंजूरियों की निरंतरता की ताजा घोषणा एक बड़ा सुधार है। इससे पूरा क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा।

वाहन उद्योग पर दबाव की वजह से इस्पात की चमक फीकी पड़ी है। आप इसमें कब से सुधार की उम्मीद देख रहे हैं?

एक महत्वपूर्ण कदम वाहन स्क्रेपेज नीति तैयार करना है। हम देख रहे हैं कि देश में इतने पुराने वाहन चल रहे हैं जिनका खरीदारी बंद हो चुकी है। हमें ऐसी नीति बनानी चाहिए जो एक दशक पुराने वाहनों को प्रतिबंधित करे। जहां तक बदलाव का सवाल है, आप उन युवा लोगों की अनदेखी नहीं कर सकते जो कारों के बजाय स्मार्टफोन की खरीदारी पसंद करते हैं और इनका इस्तेमाल उबर तथा ओला के लिए करते हैं। हालांकि वाणिज्यिक वाहनों पर केंद्रित स्क्रेपेज नीति सुधार शुरू करने का एक तरीका है।

अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार और क्या कर सकती है?

एयर इंडिया से विनिवेश की कोशिश की गई है जिससे मदद मिलेगी। सात हवाई अड्डों का निजीकरण किया गया है। रेलवे स्टेशनों के निजीकरण की प्रक्रिया पर भी विचार हो रहा है। आप 70 साल पहले की तरह रेलवे को नहीं चला सकते। यदि कोल इंडिया को कोयला ले जाना है तो उसे अपने स्वयं के माल डिब्बों की अनुमति दी जानी चाहिए और यदि जेएसडब्ल्यू को इस्पात की ढुलाई करनी है तो उसके पास स्वयं का डिब्बा होना चाहिए। टाटा स्टील और एनटीपीसी को रेलवे के बजाय माल डिब्बों में निवेश करना चाहिए। रेलवे का निजीकरण मानसिकता का विषय है और इस पर विचार किया जा रहा है।

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