हाईवे निर्माण पर ऑडिटर नजर रखेंगे

नई दिल्ली । सरकार नए राष्ट्रीय राजमार्गो को किलर हाईवे नहीं बनने देगी । सड़क यात्रियों को सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग मुहैया कराने की दिशा में पहल करते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर कड़ा निगरानी तंत्र लागू किया है । अब परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) से लेकर निर्माण के समय व राजमार्ग तैयार होने तक रोड सेफ्टी ऑडिटर की पैनी नजर रहेगी । उनकी इजाजत के बगैर नए राजमार्गो पर वाहन नहीं उतर पाएंगे । सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रलय ने यूपी के 2400 किलेामीटर लंबे नए घोषित राष्ट्रीय राजमार्गो के कंसल्टेंटों से डीपीआर व फिजिबिलटी रिपोर्ट स्तर पर रोड सेफ्टी ऑडिट कराने का आदेश दिया है । इसमें विश्व बैंक व एडीबी के तय दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा । नए नियम में यूपी में दो लेन व चार लेन के नए राष्ट्रीय राजमार्गो को बनाने से पहले उनका ट्रैफिक सर्वे कराया जाएगा । इस काम को परियोजना का ठेका देने के साथ ही शुरू करना होगा । इसके अलावा अगले 30 साल में उक्त राजमार्ग पर यातायात की संभावित वृद्धि की जानकारी भी देगा । इसके बाद कंसल्टेंट ग्राफिक सहित एक रिपोर्ट तैयार कर सड़क परिवहन मंत्रालय के रोड सेफ्टी सेल को सौंपेगा । यहां रोड सेफ्टी ऑडिट टीमें हैं । ऑडिट टीम के चीफ इंजीनियर व दूसरे विशेषज्ञ इस रिपोर्ट की पुन: जांच करेंगे । इस कवायद के पीछे सरकार का मकसद है कि राजमार्ग निर्माण में सड़क सुरक्षा की अनेदखी नहीं हो सके, क्योंकि ट्रैफिक यातायात के दबाव, प्राकृतिक व संभावित वृद्धि के मुताबिक राजमार्गो को विकसित किया जा सकेगा ।
नए निर्देश जारी
केंद्र सरकार ने इस साल जनवरी में रोड सेफ्टी ऑडिट संबंधी नए निर्देश जारी कर दिए हैं । इसमें नए राष्ट्रीय राजमार्गों का रोड सेफ्टी ऑडिट कराना अनिवार्य है । तैयार राजमार्ग पर ऑडिटर की मंजूरी के बाद ही वाहन चलने का प्रावधान है । इस साल 3000 किलोमीटर राजमार्गों का ऑडिट किया जाएगा । इसके लिए विश्व बैंक से पैसा लिया जाएगा ।

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