सस्ती हवाई यात्रा नहीं, सस्ती बुनियादी वस्तुओं की जरूरत है !

जबसे इस बात की घोषणा हुई है कि व्यक्ति 1200 रुपए में भी हवाई यात्रा कर सकता है, तभी से मेरा सुख-चैन बिना आवेदन दिए हवा-हवाई हो गया है । मेरी जिंदगी यूपीए सरकार की तरह अच्छी-भली चल रही थी परंतु इस घोषणा के बाद सारे के सारे सुख सहयोगी दलों की तरह साथ छोड़ रहे हैं ।
पत्नी यह घोषणा कर चुकी है कि इस बार यदि कहीं घूमने जाना है तो यात्रा हवाई मार्ग से ही होगी । बच्चे भी आते-जाते उन्हें उचकाकर हवाई जहाज में सफर वाली बात पूछ रहे हैं । कार्यालय में भी 1200 रुपए में यात्रा वाली चर्चाएं अपने चरम पर हैं । हवाई जहाज मेरे लिए सदैव जमीन पर खड़े रहकर मुंह ऊपर कर आकाश में देखने वाली अलौकिक वस्तु रही है । एयर होस्टेस को नजदीक से देखने की तमन्ना तो खैर दिल में हमेशा से रही । हवाई जहाज को देख लेने भर से रोमांच का अनुभव करने वाले व्यक्ति से यदि कोई हवाई जहाज में बैठने की बात करे तो आप समझ ही सकते हैं कि उसकी क्या स्थिति होगी ? हमारे घर-परिवार में जब भी किसी प्रियजन को हवाई अड्डे तक छोड़ने की बात आई तो उसमें अपना नाम हमेशा सबसे शीर्ष पर रहा ।
गाहे-बगाहे कभी-कभी कनखियों से जहाज देख लिया और प्रसन्न्ता का गुब्बारा फुलाकर घर लौट आए । खैर जबसे पत्नी का ये आग्रह या यूं कहें आदेश हुआ है, मैं आतंकित हूं । मेरे बटुए का रक्तचाप बढ़ा हुआ है । मैं यह समझ चुका हूं कि यात्रा भले ही सस्ती लग रही है, लेकिन वैसा है नहीं जैसा दिख रहा है । मैं इस निर्णय से अति नाप्रसन्न हूं, पर मैं क्या कर सकता हूं । मेरा नन्हा-सा मस्तिष्क सरकार द्वारा डाले गए में अपना तार नहीं जोड़ पा रहा है और समझने को तैयार नहीं है कि हवाई यात्रा में सब्सिडी देकर सरकार क्या चाहती है । जबकि पेट्रोल, डीजल, शक्कर, सब्जी, दालों, तेल इन बुनियादी वस्तुओं के भराव तो खुद हवाई यात्रा कर रहे हैं ?
जब तक इनके दाम नहीं घटेंगे, तब तक आम आदमी हवा में उड़कर क्या करेगा ? जमीन पर चलने वाले आदमी को जमीनी वस्तुएं ही सस्ती दरों में उपलब्ध हो जाएं तो बड़ी घटना होगी । हवाई मार्ग की यात्रा तो जीवन में कभी-कभी की जा सकती है, परंतु जीवन के जमीनी मार्ग पर आदमी सहजता से चल सके, सरकार को इसकी व्यवस्था करने की ज्यादा जरूरत है ।

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