प्रदूषण के खिलाफ अभियान से दिल्ली में ट्रकों की बिक्री घटी

नई दिल्ली । नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने पिछले साल 11 दिसंबर के अपने फैसले में राजधानी में 10 वर्षों से पुराने व्हीकल्स को चलाने पर रोक लगा दी थी और एयर पॉल्यूशन पर लगाम लगाने के लिए सभी डीजल व्हीकल्स का रजिस्ट्रेशन रोक दिया था । सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए दिल्ली-एनसीआर में 2 लीटर और इससे अधिक के डीजल व्हीकल्स के रजिस्ट्रेशन पर बैन लगाया था, लेकिन कमर्शियल व्हीकल्स को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए थे । अब एनसीआर में व्हीकल रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने 2 लीटर और इससे अधिक कैपेसिटी के डीजल इंजनों वाले नए कमर्शियल व्हीकल्स का रजिस्ट्रेशन रोक दिया है ।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने कहा कि इससे भ्रम बढ़ा है । उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को स्पष्ट करने से इनकार कर दिया है । कोर्ट ने कहा है कि उसने कभी भी कमर्शियल व्हीकल्स पर विचार नहीं किया । दूसरी ओर एनजीटी ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में डीजल व्हीकल्स के रजिस्ट्रेशन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट फैसला कर रहा है और इस वजह से वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा । इससे दिल्ली में कमर्शियल व्हीकल्स की सेल्स पर सीधा असर नहीं पड़ा है, क्योंकि राजधानी में कमर्शियल व्हीकल्स के लिए सीएनजी का इस्तेमाल करना जरूरी है । हालांकि यह एनसीआर के अन्य शहरों के लिए एक समस्या है । बैन को लगे आठ महीने का समय हो चुका है और ऐसे में कमर्शियल व्हीकल्स बनाने वाली कंपनियां मुश्किल में हैं । पैसेंजर व्हीकल्स की तरह एनसीआर मीडिया और हेवी कमर्शियल व्हीकल्स का भी सबसे बड़ा मार्केट है । देश में कमर्शियल व्हीकल्स की 2,000-2,500 यूनिट की मासिक बिक्री में एनसीआर की हिस्सेदारी 8-9 पर्सेंट की है । दिल्ली की सड़कों पर पुराने व्हीकल्स की अनुमति न देने के एनजीटी के निर्देश से नए ट्रकों के लिए रिप्लेसमेंट डिमांड पैदा होने की उम्मीद की जा रही थी । लेकिन नए रजिस्ट्रेशन पर बैन लगने से इस रीजन में मीडियम और हेवी ट्रक मार्केट लगभग थम गया है ।
देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनियों में शामिल टाटा मोटर्स का कहना है कि उसे सुप्रीम कोर्ट के अंतिम ऑर्डर से इस मुद्दे के कुछ स्पष्ट होने की उम्मीद है । कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि हम इस पर कोई टिप्पणी करने से पहले ऑर्डर के विवरणों का इंतजार करेंगे ।’ कुछ ट्रांसपोर्टर्स बैन से बचने के लिए व्हीकल्स का रजिस्ट्रेशन एनसीआर से बाहर के शहरों में करा रहे हैं । ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट परमिट रखने वाले डीजल व्हीकल्स को दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति है, लेकिन इसके लिए उन्हें एक ग्रीन टैक्स चुकाना होता है ।

1 Comment on प्रदूषण के खिलाफ अभियान से दिल्ली में ट्रकों की बिक्री घटी

  1. माननीय महोदय
    आपसे जैसे श्रेष्ट जनो के माध्यम से हमें उच्चस्थ निर्णय करियो से अनुरोध है की समस्त करो ,और नैतिक – अनैतिक भुगतानों की अदायगी के उपरांत भी ,तथा पूंजीवाद की परिभाषित कॉर्पोरेट्स की अवसरवादिता का शिकार परिवहन व्यवसाय को निरंतर तिरस्कार का सामना करना पड़ रहा है .
    कभी जय जवान ,जय किसान का नारा लगानेवालों को हमारे वाहन चालकों के श्रम का आभास नहीं होता ,उनके व्यसनों को प्राथमिकता देकर उनकी समस्याओ को प्रकाशित नहीं किया जाता .
    क्या कोई बताएगा की हमारे आपके जीवन में जवान और किसान से वाहन चालक का कही काम योगदान है …….कदाचित नहीं ..
    निरंतर चालकों की उपेक्षा का निष्कर्ष देखा जाये तो आज देश के १० % वाहन चालकों की कमी से कड़ी है . ८ % भ्रस्ट अफसरों के आतंक और उगाही के आतंक को कायम रखने हेतु राज्य परिवहन कार्यालयों के सामने खड़े है .२० % वहां बैंक और फाइनेंस के गोदाम में पड़े है सामायिक किस्तों के आभाव में , ५० % वाहन उचित किराये की मांग में खड़े है जो आज देश में यक्ष प्रश्न है .
    २२ % वाहनों पे देश निर्भर है जो खुद चालक – मालिक चला रहे है या किसी बाहुबली ,नेता,बाबा या असामाजित तत्वों के अनैतिक धन को नैतिक बनाने में कार्यरत है .हमारे आंकड़ों में फर्क हो सकता है किन्तु स्थितियों में नहीं .
    हमारे देश में करोडो की कारो में भोग विलास हेतु सब्सिडी का डीजल – पेट्रोल दिया जाता है ,किन्तु ट्रको के व्यवसायिओं को कोई राहत न देकर आये दिन नए नए करो से तंग किया जा रहा है .बच्चो की फीस समय पर न भरने के बावजूद ट्रांसपोर्टर सरकार को ग्रीन टैक्स ,फ्रोफेशनल ,नेशनल परमिट , ओवर डीमेंशन,टोल टैक्स ,बॉर्डर एंट्री के साथ हर प्रान्त में हर प्रकार से नैतिक अनैतिक भुगतान और कमाई पे इनकम टैक्स देता जा रहा है .क्या कोई इसपर विचार कर हमारी समस्याओ को संज्ञा दे सकता है .

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