जब तक ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर ध्यान नहीं होगा देश का विकास नहीं होगा

नई दिल्ली । सड़कें किसी भी देश की जीवनरेखा होती हैं और वहां की अर्थव्यवस्था का भविष्य उन्हीं पर टिका होता है । जहां सड़कें बेहतर हैं वहां की परिवहन व्यवस्था भी बेहतर होगी और वह देश दिनोंदिन तरक्की की राह पर अग्रसर रहेगा । लेकिन जहां सड़कें ठीक नहीं, वह देश आर्थिक तौर पर मजबूत नहीं हो सकता । आॅल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) के वरिष्ठ सदस्य एसके मित्तल ने यह बात कही । साथ ही उन्होंने कहा कि देश के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के आॅफिस में अमेरिका के बारे में एक टैग लाइन लिखी हुई है:- ‘अमेरिकन रोड्स आर गुड, नॉट बिकॉज अमेरिका इज रिच, बट अमेरिका इज रिच बिकॉज अमेरिकन रोड्स आर गुड । इसका मतलब है अमेरिका की रोड अच्छी हैं, इसलिए नहीं कि अमेरिका में बहुत पैसा है बल्कि वहां इसलिए काफी पैसा है, क्योंकि वहां की रोड्स बहुत अच्छी हैं । दुनियाभर में रोड्स पर काफी ध्यान दिया जाता है ताकि वहां पर रोड ट्रांसपोर्टेशन में कोई दिक्कत न हो । सामान समय से और बिना नुकसान के एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाए । वहीं हमारे देश में स्थिति बिलकुल उलट है । हर सड़क पर टोल बैरियर्स लगे हुए हैं, जहां ट्रांसपोर्टर के कई घंटे बर्बाद होते हैं । उसके बाद फिर हर स्टेट पर टैक्स बैरियर अलग से लगे हुए हैं, ट्रांसपोर्टर से वसूली के लिए । हर तरह से कोशिश रहती है कि ट्रांसपोर्टर को किस तरह से लूटा जाए ।
मित्तल का कहना है कि गडकरी जी बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं । विदेशों की तर्ज पर सड़कें भी बनवा रहे हैं, लेकिन ट्रांसपोर्टरों की जेब क्यों काटी जा रही है । ट्रांसपोर्टर सबसे ज्यादा टैक्स भरता है । रोड टैक्स देता है । उससे डीजल पर प्रति लीटर करीब छह रुपए सैस भी लिया जाता है । इसके बाद भी टोल टैक्स वसूला जाता है । उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहे कितना भी काम कर लें, जब तक हमारे देश में ट्रांसपोर्टर सेक्टर पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तब तक हमारा देश विकासशील ही रहेगा । विकसित देशों की श्रेणी में कभी शुमार नहीं हो पाएगा । क्योंकि हर देश की अर्थव्यवस्था के पीछे ट्रांसपोर्ट सेक्टर का बड़ा हाथ होता है । अगर फ्रेट पर दिनोंदिन बोझ बढ़ता जाएगा तो उसका असर अन्य चीजों पर भी देखने को मिलेगा ।
मित्तल ने कहा कि भारत को विकसित देशों की श्रेणी में खड़े होने से रोकने में टोल बैरियर्स सबसे बड़ा रोड़ा हैं और खुद नितिन गडकरी ने इस बात को माना भी था । उन्होंने 21 मई 2015 को कहा था कि अगर टोल बैरियर्स न हों तो 60 हजार करोड़ रुपए का तेल व 22 हजार करोड़ रुपए के मैन आवर को बचाया जा सकता है । लेकिन एक साल होने को है, मंत्रालय की ओर से इस 82 हजार करोड़ रुपए को बचाने के कोई प्रयास नहीं किए गए । उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले फास्ट टैग योजना सरकार लेकर आई ताकि ट्रांसपोर्टरों को बैरियर्स पर रुकने की जरूरत न पड़े, लेकिन वह फ्लॉप हो गई । अब उन्होंने इस योजना में स्टेट बैंक आॅफ इंडिया को भी जोड़ लिया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई जा सके । गडकरी जिस टैग लाइन को अपने आॅफिस में लगाकर रखते हैं, उसी आधार पर काम क्यों नहीं करते । अगर देश को शिखर पर लेकर जाना है तो टोल बैरियर मुक्त भारत बनाना होगा । मित्तल ने कहा कि अब सरकार जीएसटी लेकर आ रही है । ट्रांसपोर्टर को मारने की तैयारी की जा रही है । उन्होंने कहा कि आरटीआई में उपलब्ध जानकारी के अनुसार हाईवे पर मौजूद टोल बैरियर्स से 2014-15 में सरकार को 14157 करोड़ की आमदनी हुई थी । फिर सरकार एक बार में पैसा लेकर सड़क को फ्री क्यों नहीं कर देती । इससे देश का हजारों करोड़ रुपया बचेगा, जिसका उपयोग देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है ।

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