वाहन के ड्राइवर और क्लीनर भी होंगे थर्ड पार्टी में शामिल



ट्रक आपरेटरों के साथ साथ बस और कैब चलाने वालों के लिए बड़ी परेशानी ये थी कि वे वाहन का बीमा अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए करवाते थे। हर वाहन को थर्ड पार्टी बीमा कराना जरूरी होता है और ये इसलिए होता है कि अगर आपका वाहन किसी अन्य वाहन के साथ टकरा जाता है तो उस हादसे में जान गंवाने वालों या फिर चोटिल होने वालों को ट्रिब्यूनल की ओर से वित्तीय सहायता दी जा सके। इसमें परेशानी ये थी कि इंश्योरेंस कराने वाले को कोई फायदा नहीं मिलता था और उसे हजार्ने के तौर पर बेहद मामूली सी रकम पकड़ा दी जाती थी। लेकिन हालही में मोटर व्हीकल एक्ट में किए गए बदलावों में इस परेशानी को दूर कर दिया गया है। ट्रांसपोर्ट मंत्रालय ने इस संबंधित पूरी परिभाषा को बदल दिया है जिससे की ड्राइवर व क्लीनर को बड़ी राहत मिलेगी। नए नियमों के अनुसार अब जिस वाहन से एक्सीडेंट होता है उसका ड्राइवर और क्लीनर भी थर्ड पार्टी बीमा का फायदा ले सकेगा। इस दिशा में कई और अहम बदलाव भी किए गए हैं और वो हम अपने दर्शकों व पाठकों को आने वाले एडिशन में बताएंगे। मौजूदा समय में ये होता था कि एक्सीडेंट होने पर उस वाहन में बैठे लोगों को क्लेम मिलता था जो प्रभावित होने वाले वाहन में सवार होते हैं। यानी जिस गाड़ी से एक्सीडेंट हुआ है उसका ड्राइवर, क्लीनर, सवारी आदि को थर्ड पार्टी क्लेम से मदद मिलती थी। जिस वाहन से एक्सीडेंट हुआ होता, उसका ड्राइवर और उसके साथ वाहन में सवार क्लीनर आदि को क्लेम में शामिल नहीं किया जाता था। उन्हें अपनी जान गंवाने पर भी किसी प्रकार की कोई वित्तीय मदद नहीं मिलती थी। मोटर व्हीकल क्लेम ट्रिब्यूनल में क्लेम फिक्स नहीं होता है और ऐसे में प्रभावित होने वालों को कितना भी क्लेम दिया जा सकता है। वहीं जिस वाहन से एक्सीडेंट हुआ है उसमें प्रभावित होने वालों को सिर्फ वर्कमेन कंपनसेशन के तौर पर छोटी सी रकम दे दी जाती थी। उसमें भी कंपनी कई प्रकार के क्लॉज लेकर आती थी कि ड्राइवर कितने सालों से मालिक के पास काम कर रहा था, उसकी उम्र कितनी थी और अभी वो कितना समय काम कर सकता था। इन सभी बातों पर चर्चा करने के बाद ही कंपनी एक्सीडेंट करने वाले ड्राइवर और क्लीनर के परिवार को एक या दो लाख रुपए का कंपनसेशन दिया जाता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा और जिस वाहन से एक्सीडेंट हुआ है उसे भी थर्ड पार्टी क्लेम के अंतर्गत लाकर क्लेम दिया जा सकेगा। इससे उनके परिवारों को भी राहत मिलेगी और वे भी ज्यादा क्लेम लेकर अपनी जिंदगी बेहतर तरीके से व्यतीत कर सकेंगे। परिवार के लिए बेहद जरूरी होता है क्लेम: ट्रक और बस चलाने वाले ड्राइवर हों या फिर कैब चलाने वाला। कोई भी ये नहीं चाहता कि उसके वाहन का एक्सीडेंट हो, लेकिन जब एक्सीडेंट हो जाता है तो मुश्किल दौर से गुजर रहे परिवारों के लिए क्लेम का पैसा कुछ राहत जरुर प्रदान करता है। हर किसी को उम्मीद होती है कि परिवार को अधिक से अधिक क्लेम मिले जिससे की गुजारा अच्छे से हो सके। ड्राइवर दोनों ही वाहन का प्रभावित होता है और जान का खतरा दोनों ही ओर बराबर का बना रहता है। ये फैसला गलत था कि सामने वाले वाहन को ही क्लेम दिया जाए, लेकिन अब सरकार ने इसे सही किया है और दोनों ही तरफ के ड्राइवर को इसमें कवर किया गया है। कम से कम 5 लाख का क्लेम: एक और फैसला इसमें किया गया है। एक्सीडेंट होने पर जान गंवाने वाले को कम से कम पांच लाख रुपए का क्लेम दिया जाएगा। इससे कम क्लेम नहीं दिया जा सकता जबकि ट्रिब्यूनल ज्यादा से ज्यादा क्लेम जरूर प्रदान कर सकती है। वहीं अगर गंभीर रूप से अगर चोटिल हो जाता है कोई तो उसे 2.5 लाख रुपए का क्लेम दिया जाएगा। पहले सिर्फ म़ृत्यू होने पर और कोई शरीर का अंग गंवाने पर ही क्लेम दिया जाता था, लेकिन अब इंजरी होने की सूरत में भी क्लेम दिया जाएगा। ये फैसला सच में काबिले तारीफ है और इससे ड्राइवरों को काफी राहत मिलेगी। 

माहिर भी मानते हैं इस फैसले को सहीइंश्योरेंस समुदाय से जुड़े एक्सपर्ट भी सरकार के इस बदलाव को सही मानते हैं। ब्रोकर एसोसिएशन आॅफ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट एसके जैन ने कहा कि सरकार का ये फैसला सही है और एक्सीडेंट होने पर दोनों ही वाहनों में सवार होने वालों को थर्ड पार्टी क्लेम का फायदा दिया जाना चाहिए था। अब इसमें हर कोई शामिल हो गया है। एक्सीडेंट करने वाले ड्राइवर और क्लीनर के साथ साथ जिसका माल ट्रक में जा रहा है उस माल का मालिक या कोई अन्य अधिकारी भी इस बदलाव के बाद फायदा ले सकेगा। कुल मिलाकर ये इंडस्ट्री में काम कर रहे लोगों के लिए राहत लाने वाला फैसला है।

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